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अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा: रघुनाथ दरबार में 300 देवी-देवताओं ने भरी हाजिरी, लंकादहन के साथ होगा समापन

Mon, 26 Oct 2026 08:39 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू।

सार

सभी देवी-देवताओं ने भगवान रघुनाथ के दरबार में उपस्थित होकर सदियों पुरानी देव परंपरा का निर्वहन किया। मान्यता के अनुसार लंका पर चढ़ाई से पूर्व सभी देवी-देवता रघुनाथ को अपनी शक्तियां सौंपने आते हैं।
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रघुनाथ दरबार में देवी-देवताओं ने भरी हाजिरी। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के छठे दिन मोहल्ला (महामिलन) पर्व पर 300 से अधिक देवी-देवताओं ने हाजिरी भरी। सभी देवी-देवताओं ने भगवान रघुनाथ के दरबार में उपस्थित होकर सदियों पुरानी देव परंपरा का निर्वहन किया। मान्यता के अनुसार लंका पर चढ़ाई से पूर्व सभी देवी-देवता रघुनाथ को अपनी शक्तियां सौंपने आते हैं। मोहल्ला के लिए सभी देवता अपने अस्थायी शिविरों से बाहर निकले और परंपरा का निर्वहन किया। भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर में सभी देवी-देवताओं की बाकायदा उपस्थिति दर्ज करने की विशेष व्यवस्था रही।

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रघुनाथ की ओर से भेजी गई छड़ी निमंत्रण के बाद माता हिडिंबा सबसे पहले पहुंचीं। माता ने राजा की चानणी के पास जाकर सबसे पहले अपनी आधिकारिक उपस्थिति दर्ज करवाई। दोपहर एक बजे के बाद देवी-देवताओं का अपने शिविरों से बाहर निकलने का सिलसिला शुरू हुआ। दोपहर तीन बजे तक ढालपुर मैदान में श्रद्धालुओं और देवलुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। ढोल-नगाड़ों, नरसिंगों और करनाल की स्वरलहरियों के बीच देवताओं का भव्य देव मिलन भी हुआ। कई देवता अस्थायी शिविर में मोहल्ला की रस्म पूरी करने के बाद दूसरे देवताओं के शिविरों में भी देवमिलन के लिए पहुंचे।
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लंकादहन के साथ संपन्न होगा कुल्लू दशहरा
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का औपचारिक समापन मंगलवार को पारंपरिक लंकादहन रस्म के साथ होगा। भगवान रघुनाथ अपने भव्य रथ में सवार होकर लंका दहन के लिए रवाना होंगे। लंका बेकर नामक स्थान पर समापन की तमाम देव प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। रथयात्रा ढालपुर स्थित अस्थायी शिविर से शुरू होकर सीधे पशु मैदान तक पहुंचेगी। लंका दहन के दिन सोमवार को आनी, निरमंड, बंजार के कई देवता दोपहर 12 बजे के पहले ही अपने देवालयों की ओर प्रस्थान कर जाएंगे। लंका दहन में अधिकतर खराहल, ऊझी घाटी, महाराजा सहित अन्य क्षेत्रों के देवता ही शामिल होंगे।
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