रघुनाथ की ओर से भेजी गई छड़ी निमंत्रण के बाद माता हिडिंबा सबसे पहले पहुंचीं। माता ने राजा की चानणी के पास जाकर सबसे पहले अपनी आधिकारिक उपस्थिति दर्ज करवाई। दोपहर एक बजे के बाद देवी-देवताओं का अपने शिविरों से बाहर निकलने का सिलसिला शुरू हुआ। दोपहर तीन बजे तक ढालपुर मैदान में श्रद्धालुओं और देवलुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। ढोल-नगाड़ों, नरसिंगों और करनाल की स्वरलहरियों के बीच देवताओं का भव्य देव मिलन भी हुआ। कई देवता अस्थायी शिविर में मोहल्ला की रस्म पूरी करने के बाद दूसरे देवताओं के शिविरों में भी देवमिलन के लिए पहुंचे।
लंकादहन के साथ संपन्न होगा कुल्लू दशहरा
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का औपचारिक समापन मंगलवार को पारंपरिक लंकादहन रस्म के साथ होगा। भगवान रघुनाथ अपने भव्य रथ में सवार होकर लंका दहन के लिए रवाना होंगे। लंका बेकर नामक स्थान पर समापन की तमाम देव प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। रथयात्रा ढालपुर स्थित अस्थायी शिविर से शुरू होकर सीधे पशु मैदान तक पहुंचेगी। लंका दहन के दिन सोमवार को आनी, निरमंड, बंजार के कई देवता दोपहर 12 बजे के पहले ही अपने देवालयों की ओर प्रस्थान कर जाएंगे। लंका दहन में अधिकतर खराहल, ऊझी घाटी, महाराजा सहित अन्य क्षेत्रों के देवता ही शामिल होंगे।