अंतरराष्ट्रीय लोकनृत्य उत्सव कुल्लू दशहरा आज से सात दिन के लिए शुरू होने जा रहा है। इस बार उत्सव में देव परंपराओं का निर्वहन तो होगा, लेकिन 48 साल बाद देवी-देवताओं के इस महाकुंभ में देव-मानस का भव्य मिलन नहीं होगा। भगवान रघुनाथ की अगवाई वाले दशहरे में सैकड़ों देवी-देवताओं की जगह इस बार मात्र सात देवी-देवता ही शिरकत करेंगे।
मनाली से राज परिवार की दादी माता हिडिंबा दशहरे में शिरकत करने के लिए निकल चुकी हैं। वर्ष 1972 के बाद पहली बार मात्र 200 लोग रघुनाथ के रथ को खींचेंगे। हालांकि 1971 को हुए गोलीकांड के चलते अगले साल दशहरे में रघुनाथ शामिल नहीं हो पाए और ढालपुर में रथयात्रा का भव्य आयोजन भी नहीं हो सका था। 25 से 31 अक्तूबर तक मनाए जाने वाले दशहरे का विधिवत शुभारंभ पहली बार भगवान रघुनाथ की रथयात्रा से होगा।
रविवार दोपहर दो बजे पालकी में सवार होकर रघुनाथ ढोल-नगाड़ों की थाप पर पुलिस के कड़े पहरे के साथ मैदान में आएंगे। दोपहर बाद शाम करीब चार बजे माता भुवनेश्वरी भेखली और माता जगन्नाथी भुवनेश्वरी का इशारा मिलते ही रथयात्रा शुरू होगी। भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने कहा कि रघुनाथ की यात्रा में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ सभी कारकून और देवलु मास्क पहनकर आएंगे।
हिडिंबा समेत सात देवी-देवता पहुंचेंगे दशहरे में
दशहरा उत्सव में खराहल घाटी के बिजली महादेव, राजपरिवार की दादी माता हिडिंबा, नग्गर की माता त्रिपुरा सुंदरी, खोखन के देवता आदि ब्रह्मा, पीज के जमदग्नि ऋषि, रैला के लक्ष्मी नारायण और ढालपुर के देवता वीरनाथ (गौहरी) शामिल होंगे।
1650 को अयोध्या से लाई गई थी रघुनाथ की मूर्ति
1650 को अयोध्या से लाए गए भगवान रघुनाथ की मूर्ति के बाद ढालपुर में दशहरा उत्सव का आयोजन किया जाता है। तब से लेकर जिला के सैकड़ों देवी-देवता भगवान रघुनाथ की अध्यक्षता में मनाए जाने वाले कुल्लू दशहरा में शिरकत करते आ रहे हैं। दशहरा का आयोजन 370 सालों से चला आ रहा है।
रथयात्रा में 200 लोग ही होंगे शामिल
रथयात्रा में सभी सात देवी-देवताओं के 15-15 लोग कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट के साथ भाग लेंगे। कोई भी लोग देवी-देवताओं के पास नहीं जाएंगे। पुलिस ने पांच जगह नाके लगाए हैं, जहां बाहर से आने वाले लोगों को वापस भेजा जाएगा।