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अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस: ऑक्सफोर्ड से यूरोप तक हिमाचल की बेटियों का जलवा, विज्ञान और शोध में बनाई पहचान

Sun, 11 Oct 2026 11:02 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश की बेटियां सीमित संसाधनों और कठिन पहाड़ी परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा, विज्ञान, पर्यावरण अनुसंधान और कला में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रही हैं। सोलन की साक्षी शर्मा को ऑक्सफोर्ड में डॉक्टरेट के लिए पूर्ण छात्रवृत्ति मिली, जबकि ऊना की कारवां कौशल का चयन स्लोवाकिया के कोमेनियस विश्वविद्यालय के शोध दल में हुआ। इन उपलब्धियों के साथ प्रदेश की महिला शोधकर्ताओं और कलाकारों का योगदान भी प्रेरणा बन रहा है।
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अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश की बेटियां सीमित संसाधनों और पहाड़ की कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी प्रतिभा के दम पर वैश्विक मंच पर पहचान बना रही हैं। शिक्षा, विज्ञान, पर्यावरण अनुसंधान और कला के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियां दूसरी बेटियों के लिए प्रेरणा बन रही हैं। किसी ने ब्रिटेन के प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में डॉक्टरेट के लिए पूर्ण छात्रवृत्ति हासिल की, तो किसी ने यूरोप के विश्वविद्यालय में शोध दल का हिस्सा बनकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाई। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर हिमाचल की इन उपलब्धियों की चर्चा बेटियों के सपनों और संभावनाओं को रेखांकित करती है।

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सोलन की साक्षी शर्मा को ऑक्सफोर्ड में डॉक्टरेट के लिए छात्रवृत्ति
सोलन की साक्षी शर्मा ने विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उन्हें सशक्त छात्रवृत्ति प्राप्त करने के बाद ब्रिटेन के प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में रसायन विज्ञान में डीफिल यानी डॉक्टरेट के लिए प्रवेश और पूर्ण छात्रवृत्ति मिली। सशक्त छात्रवृत्ति का उद्देश्य विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित जैसे क्षेत्रों में मेधावी छात्राओं को आगे बढ़ने के अवसर देना है। साक्षी की उपलब्धि दिखाती है कि हिमाचल की बेटियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में अपनी जगह बना सकती हैं।
 

ऊना की कारवां कौशल का यूरोप के शोध संस्थान में चयन
ऊना जिले के लोअर देहलां गांव की कारवां कौशल ने भी अंतरराष्ट्रीय शोध के क्षेत्र में पहचान बनाई है। पंजाब विश्वविद्यालय और एनआईटी स्तर पर उच्च अध्ययन के बाद उनका चयन स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा स्थित कोमेनियस विश्वविद्यालय के शोध दल में हुआ। उनका शोध कार्य पर्यावरण रसायन और सामग्री विज्ञान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के अंतर्गत रहा है। उनकी उपलब्धि हिमाचल के ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद प्रतिभा और वैज्ञानिक शोध में आगे बढ़ने की संभावनाओं को सामने लाती है।
 

पर्यावरण और जलवायु अनुसंधान में भी योगदान
हिमाचल से जुड़ी महिला शोधकर्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण और जलवायु अनुसंधान के क्षेत्र में भी काम किया है। डॉ. विशाखा शर्मा का नाम हिमालयी जैव विविधता, आर्द्रभूमि और जल पारिस्थितिकी से जुड़े शोध के संदर्भ में सामने आया है।

फुलब्राइट-कलाम जलवायु फेलोशिप भारतीय शोधकर्ताओं को अमेरिका में जलवायु परिवर्तन और उसके अनुकूलन से जुड़े अध्ययन के अवसर उपलब्ध कराती है। वहीं, स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और एल्सेवियर की ओर से प्रकाशित विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल शोधकर्ताओं की उपलब्धियां भी प्रदेश की वैज्ञानिक क्षमता को रेखांकित करती हैं।
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पारंपरिक कला को वैश्विक पहचान दिला रही नई पीढ़ी
विज्ञान और शिक्षा के साथ हिमाचल की बेटियां कला और पारंपरिक शिल्प के क्षेत्र में भी योगदान दे रही हैं। पद्मश्री से सम्मानित ललिता वकील जैसी कलाकारों की विरासत नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। नई पीढ़ी की कलाकार प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से हिमाचल की पारंपरिक कला को व्यापक पहचान दिलाने में जुटी हैं।

बेटियों की उपलब्धियां बन रहीं प्रेरणा
हिमाचल की इन बेटियों की उपलब्धियां बताती हैं कि अवसर, शिक्षा और निरंतर प्रयास से पहाड़ के दूरदराज क्षेत्रों से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर इन उदाहरणों का महत्व केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी दिखाता है कि बेटियों को शिक्षा, शोध और रचनात्मक क्षेत्रों में आगे बढ़ने के अवसर मिलें तो वे समाज और प्रदेश की पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती हैं।
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