केंद्र सरकार की इंटीग्रेटिड हाउसिंग एंड स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईएचएसडीपी) के तहत प्रदेश सरकार को शहरी गरीबों के लिए 1200 आवास बनाना चुनौती से कम नहीं है। ये योजना मार्च 2015 में खत्म होगी। इस योजना के तहत प्रदेश के जिलों में 40 फीसदी काम हुआ है जबकि 60 फीसदी काम होना है।
सरकार के पास 6 महीने है, जिसमें शहरी गरीबों के लिए आवास बनाने होंगे। अगर निर्धारित समय में आवास नहीं बने तो पैसा वापस केंद्र को वापस हो जाएगा। शहरी गरीबों को आवास उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने 2008 में 33 करोड़ रुपए की राशि जारी की थी।
अब पैसा हाथ से जाता देख शहरी विकास विभाग ने 5 नवंबर को देश-विदेश की नामी कंपनियों के अधिकारियों से बैठक करने का फैसला लिया है। इसमें कंपनियों को छह माह के भीतर आवास तैयार करने का टारगेट दिया जाएगा। बैठक बुलाने की पुष्टि निदेशक शहरी विकास विभाग जेएम पठानिया ने की है।