झाड़-फूंक करने वालों के पास जाने वालों को मानसिक उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया जाए और उनका समुचित उपचार करवाया जाए। मुख्य सचिव आरडी धीमान ने यह निर्देश शनिवार को मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम-2017 पर हुई बैठक में जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि मेंटल हेल्थ एक्ट के तहत मानसिक स्वास्थ्य उपचार मरीजों का अधिकार है। उन्होंने पुलिस विभाग को भी निर्देश जारी किए कि जो मनोरोगी सड़कों पर घूमते हैं, उन्हें स्थानीय थाना प्रभारी या तो मानसिक रोग उपचार वाले अस्पताल में ले जाएं या न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश करें।
मुख्य सचिव शनिवार को शिमला में मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम 2017 पर राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण शिमला की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक रोकथाम और उपचार के माध्यम से गैर-संचारी रोगों से समयपूर्व मृत्यु दर को एक तिहाई कम करने और मानसिक स्वास्थ्य व कल्याण को बढ़ावा देने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे जादुई उपचार के झांसे में न आएं, क्योंकि यह प्रारंभिक निदान और उपचार में हस्तक्षेप करता है।
प्रधान सचिव स्वास्थ्य सुभासीष पंडा ने मुख्य सचिव का स्वागत किया। हिमाचल प्रदेश मानसिक स्वास्थ्य एवं पुनर्वास अस्पताल शिमला के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक एवं हिमाचल प्रदेश राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. संजय पाठक ने मानसिक स्वास्थ्य देख-रेख अधिनियम 2017 पर प्रस्तुति दी। आईजीएमसी के मनोचिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. दिनेश दत्त शर्मा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य सुखमय जीवन की एक अवस्था है।