बता दें कि इस स्कूल में हिंदी, अंग्रेजी व संस्कृत भाषा में भी प्रार्थना सभा का आयोजन किया जा रहा है। पहली बार स्थानीय पहाड़ी भाषा को चौथा स्थान देते हुए इसे भी सभा में शामिल किया गया। इस पहल की क्षेत्र में भी जमकर प्रशंसा हो रही है। सभा के दौरान सावधान, विश्राम, नीचे बैठना व खड़े होना सहित बैंड को इशारा करने का उच्चारण भी पहाड़ी बोली में ही किया जा रहा है। राष्ट्रीय गीत व राष्ट्रीय गान से किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की गई है।
खास बात यह भी है कि यह स्कूल शहरी क्षेत्र का है, जहां 210 छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। पाठशाला में आसपास के ग्रामीण इलाकों की छात्राएं भी पढ़ रही हैं। लिहाजा, सभी बच्चों को पहाड़ी बोली में ढालने के लिए एक माह का वक्त लगा। स्कूल के सरस्वती सदन ने पहाड़ी भाषा में प्रार्थना सभा कराने का जिम्मा अपने कंधों पर लिया है।
इसका नेतृत्व टीजीटी अध्यापक अनंत आलोक व निशा ठाकुर कर रहे हैं। मुख्याध्यापिका उषा रानी ने बताया कि अपने स्कूल में कुछ अलग व हटकर करने की सोच के साथ पहाड़ी बोली को महत्व दिया गया है। यहां हिंदी, अंग्रेजी व संस्कृत भाषाओं में भी प्रार्थना सभा कराई जा रही है। इसे नियमित जारी रखा जाएगा।