वाईडब्ल्यूसीए की ओर से किया आयोजन
अधिवक्ता सीमा सूद ने किया प्रतिभागियों का मार्गदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। मशोबरा के कम्याणा गांव में महिलाओं को घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम (पीडब्यूडीवी एक्ट), यौन अपराधों पर बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) और डिजिटल हिंसा के दायरे तथा प्रभाव बताए गए।
जागरूकता कार्यक्रम में महिलाओं को ऑनलाइन सही व्यवहार करने, स्क्रीन टाइम कम करने और ऑनलाइन व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने की सलाह दी तथा गलती से ऐसा होने पर सुरक्षा के उपाय भी बताए। यह जानकारी यंग वुमन एसोसिएशन (वाईडब्ल्यूसीए) शिमला की ओर से सोमवार को आयोजित जेंडर-बेस्ड और डिजिटल हिंसा पर आयोजित कार्यक्रम में दी गई। इस एक घंटे के सत्र में गांव की सभी महिलाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में हाईकोर्ट की अधिवक्ता सीमा सूद ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। उन्होंने बताया कि 40 फीसदी से कम देशों में डिजिटल हिंसा के खिलाफ कानून हैं जिससे कई पीड़ितों को कानूनी सुरक्षा नहीं मिलती है। इस संबंध में सरकार, तकनीक कंपनियों और नागरिक समाज की ओर से तत्काल और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है। इसके अलावा जागरूकता कार्यक्रम में जेंडर-बेस्ड हिंसा के बारे बताया गया कि यह दुनिया में सबसे प्रचलित मानवाधिकार उल्लंघनों में से एक है। यह सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय सीमाओं को नहीं जानता है। यह रोकी जा सकती है लेकिन इसके मूल कारणों को समझने और इसके विभिन्न रूपों को संबोधित करने की आवश्यकता है। इस अवसर पर वाईडब्ल्यूसीए की महासचिव रोहिणी सिंह ने कहा कि माताएं अपने बच्चों को डिजिटल हिंसा से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।