देवी देवताओं के महाकुंभ दशहरा उत्सव में एक साल बाद दो बहनों का मिलन देख देवलु भावुक हो गए। रविवार को नरोगी की माता भागासिद्ध अपने देवलुओं के साथ बहन दशमी वारदा के अस्थायी शिविर में पहुंची। माता के साथ देवता खोडू भी साथ थे। इसके बाद माता दशमी वारदा और देवता ब्रिंडू के रथ को शिविर से बाहर निकाला गया।
माता भागासिद्ध और दशमी वारदा दोनों बहनों का भव्य देव मिलन हुआ। एक साल बाद हुए भव्य देव मिलन को देखकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। माता दशमी वारदा ने गूर के माध्यम से कहा कि कलियुग में आदमी अपने नियमों को भूल चुका है, लेकिन हम सतयुग के देवता हैं जो पहले भी ऐसे थे और आज भी ऐसे हैं। माता भागासिद्ध के पुजारी मोहर सिंह ठाकुर ने कहा कि दशहरे में हर साल दोनों देवियों का मिलन होता है।
दशहरा उत्सव के तीसरे दिन भगवान नरसिंह ने ढालपुर में रक्षा सूत्र बांधा और राजा की चानणी से नरसिंह भगवान की शाही अंदाज में छह देवी-देवताओं की मौजूदगी में दूसरी भव्य जलेब निकली। जलेब में ढोल नगाड़ों की थाप पर देवताओं संग देवलु भी झूमे। नरसिंह भगवान की दूसरी जलेब में जिला कुल्लू के आराध्य देवता रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह भी पालकी में सवार हुए। जलेब में सैंज घाटी के देवी देवता शामिल हुए।
शाम साढ़े चार बजे सैंज वैली में सैंज के लक्ष्मी नारायण, माता आशापुरी, शैंशर के देवता मनु ऋषि, बनोगी देहुरी के देवता पुंडरिक ऋषि, करथा नाग, वासुकी नाग देवलुओं के साथ राजा की चानणी के पास इकट्ठा हुए। इसके बाद नरसिंह भगवान की घोड़ी आगे चली।
इसके पीछे जलेब का काफिला चला। मोहल्ला उत्सव होने तक प्रतिदिन कुल्लू दशहरा में जलेब निकाली जाएगी। मान्यता यह है कि आसुरी शक्तियों का प्रभाव दशहरा में सम्मलित हुए देव समाज पर न हो, इसलिए भगवान नरसिंह की जलेब के माध्यम से सुरक्षा घेरा बांधते हैं। इससे दशहरा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होता है।