राज्य विद्युत विनियामक आयोग में हुई जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में उद्योगपति शामिल हुए। उद्योगपतियों ने कहा कि बिजली शुल्क और अतिरिक्त उपकरों के कारण उद्योगों को भारी नुकसान हो रहा है। बिजली सब्सिडी को समाप्त करने के कारण उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, इससे उद्योगों को लाभ के नजरिये से अन्य राज्यों के साथ हिमाचल की प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई है। सस्ती बिजली हिमाचल प्रदेश का मुख्य आकर्षण था, जिसने उद्योगों को यहां निवेश करने के लिए प्रेरित किया लेकिन हालिया टैरिफ बढ़ोतरी के कारण यह लाभ अब समाप्त हो गया है।
मिल्क और पर्यावरण सेस से भी पड़ा वित्तीय बोझ
उद्योगपतियों ने कहा कि बिजली दरों में बढ़ोतरी के साथ मिल्क सेस और पर्यावरण सेस से भी उद्योगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा है। अब हिमाचल प्रदेश बिजली दरों के मामले में पड़ोसी राज्यों की तुलना में महंगा हो गया है, जिससे कई उद्योग यहां काम जारी रखने को लेकर पुनर्विचार कर सकते हैं।