बेटियों की कामयाबी के लिए परिजन एक पहर का खाना खा रहे हैं। प्रियंका नेगी के पिता कंवर सिंह नेगी और माता सुनीता नेगी ने अपने ईष्ट देवता गुग्गा पीर की आस्था में व्रत रखा है। रितु नेगी के पिता भवान सिंह नेगी और पूर्णिमा नेगी हर रोज पूजा कर रहे हैं।
जीत के बाद भवान सिंह बेटी सहित उत्तराखंड स्थित कुल देवता के दर्शन करने जाएंगे, जबकि कंवर सिंह नेगी जागरण करवाएंगे। उधर, जीत के बाद पूरे सिरमौर में जश्न का माहौल है। पांवटा में भी युवाओं ने मिठाई बांटकर जीत का जश्न मनाया।
एशियन गेम्स में भारतीय महिला कबड्डी टीम से खेल रहीं सिरमौर की प्रियंका नेगी का चैंपियन बनने तक का सफर संघर्षपूर्ण रहा है। एक किसान की बेटी के लिए यह आसान नहीं था कि वह इस मुकाम तक पहुंचे, लेकिन उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
मूल रूप से शिलाई से कई किलोमीटर दूर चबियार निवासी प्रियंका ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई चाचा के घर रहकर की। आठवीं तक पढ़ाई शिलाई में करने के बाद उनका खेल छात्रावास बिलासपुर के लिए चयन हुआ। यही उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।
आज वे भारतीय टीम की बेहतर खिलाड़ियों में से एक हैं।प्रियंका नेगी के पिता कंवर सिंह नेगी पेश से किसान हैं। पशुपालन और खेतीबाड़ी हर परिवार का भरण पोषण करते थे।
कंवर सिंह नेगी ने बताया कि वे ज्यादा पढ़े-लिखे भी नहीं हैं। बेटी को अपने से दूर नहीं करना चाहते थे, लेकिन बेटी के भविष्य को देखते हुए खेल छात्रावास भेज दिया। उससे पहले वे शिलाई में अपने चाचा के घर रहकर पढ़ाई करती थीं।
हिमाचल पुलिस में इंस्पेक्टर पद मिलने के बाद वे अपनी बहन और भाई को भी अपने साथ रखकर उनकी पढ़ाई करवा रही हैं। एक भाई खेल छात्रावास ऊना में खेल प्रशिक्षण ले रहा है। बिलासपुर में प्रशिक्षण लेने के बाद प्रियंका कबड्डी चैंपियन की श्रेणी में आ गई हैं।
विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रियंका ने कई मेडल जीते हैं। कबड्डी चैंपियन रितु नेगी स्कूल की शिक्षा के लिए रोजाना दस किलोमीटर पैदल चलकर शिलाई पहुंचती थीं। दोनों का चयन एकसाथ खेल छात्रावास बिलासपुर के लिए हुआ। बिलासपुर के प्रशिक्षण के बाद रितु ने कई मेडल जीते।