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कैसे पहुंचेगी समदो बॉर्डर तक सेना, पांच घंटे के सफर के लग रहे 12 घंटे

Sun, 28 Jun 2020 09:05 AM IST
अरविन्द ठाकुर अशोक राणा, अमर उजाला नेटवर्क, केलांग (लाहौल-स्पीति)
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फाइल फोटो
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सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण 205 किलोमीटर लंबे ग्रांफू-काजा-समदो मार्ग की बदहाल स्थिति दशकों बाद भी नहीं सुधरी है। सड़क की सबसे खराब हालत ग्रांफू से बातल तक है। 55 किमी के इस प्वाइंट में सड़क कम और गड्ढे अधिक नजर आते हैं। निगम की बस को इस 55 किलोमीटर मार्ग को तय करने में तीन से चार घंटे का समय लगता है। ग्रांफू से समदो पहुंचने में 5 घंटे लगते हैं, लेकिन आजकल 12 घंटे लग रहे हैं। 

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बीआरओ के लिए भी यह मार्ग एक चुनौती बना हुआ है। पारछू झील के फटने से हिंदुस्तान-तिब्बत सड़क अवरुद्ध होने से ग्रांफू-समदो मार्ग सेना के लिए लाइफलाइन साबित हुआ था। यह सड़क समदो बॉर्डर को ग्रांफू में मनाली-लेह सामरिक मार्ग से जोड़ता है। 18 जून को केंद्र सरकार ने राजपत्र जारी कर इस मार्ग को एनएच से लेकर फिर बीआरओ को सौंप दिया है, लेकिन दशकों से सड़क की हालत जस की तस है।

सबसे बदहाल ग्रांफू से बातल तक न तो बीआरओ और न ही लोनिवि सड़क को सुधार पाया है। इस बीच सड़क पत्थरों और नालों से होकर गुजरती है। सड़क की हालत नाजुक होने के कारण ग्रांफू से बातल के बीच वाहन महज 15 से 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलते हैं। हालांकि सड़क सुधारने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। छोटे वाहनों को इस सड़क पर दौड़ाना किसी चुनौती से कम नहीं है।

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यही कारण है कि अधिकांश पर्यटक वाहनों को बीच रास्ते से ही मनाली वापस लौटना पड़ता है। स्पीति के पर्यटन कारोबारी नरेंद्र, रिगजिन, पदमा तथा अंगदुई ने बताया कि ग्रांफू से बातल के बीच सड़क कम, जबकि गड्ढे और पत्थर ज्यादा नजर आते हैं। सड़क की हालत खराब अधिक होने से 50 फीसदी पर्यटक आधे रास्ते से वापस मनाली लौट जाते है। उधर, बीआरओ अधिकारी का कहना है कि करोड़ों के बजट की डीपीआर को केंद्र सरकार की अनुमति मिल गई है। अब ग्रांफू-समदो मार्ग को प्राथमिकता के आधार पर चकाचक किया जाएगा।

पारछू हादसे के दौरान लाइफलाइन बना मार्ग
करीब दो दशक पहले पारछू झील के टूटने से ग्रांफू-समदो सड़क सेना के लिए लाइफलाइन साबित हुई थी। झील के फटने से हिंदुस्तान-तिब्बत मार्ग का बड़ा हिस्सा ढह जाने से बॉर्डर में सेना की सप्लाई प्रभावित हुई।

तब समदो बॉर्डर पहुंचने के लिए सेना और आईटीबीपी ने ग्रांफू-समदो मार्ग का इस्तेमाल किया। इसी सड़क से तब सेना का असला बारूद के साथ खाद्य सामग्री की आपूर्ति की गई। चिचम के परंगला दर्रा होकर बीआरओ लेह-लदाख बॉर्डर के लिए एक और सामरिक सड़क का निर्माण करने जा रहा है।
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