यही कारण है कि अधिकांश पर्यटक वाहनों को बीच रास्ते से ही मनाली वापस लौटना पड़ता है। स्पीति के पर्यटन कारोबारी नरेंद्र, रिगजिन, पदमा तथा अंगदुई ने बताया कि ग्रांफू से बातल के बीच सड़क कम, जबकि गड्ढे और पत्थर ज्यादा नजर आते हैं। सड़क की हालत खराब अधिक होने से 50 फीसदी पर्यटक आधे रास्ते से वापस मनाली लौट जाते है। उधर, बीआरओ अधिकारी का कहना है कि करोड़ों के बजट की डीपीआर को केंद्र सरकार की अनुमति मिल गई है। अब ग्रांफू-समदो मार्ग को प्राथमिकता के आधार पर चकाचक किया जाएगा।
पारछू हादसे के दौरान लाइफलाइन बना मार्ग
करीब दो दशक पहले पारछू झील के टूटने से ग्रांफू-समदो सड़क सेना के लिए लाइफलाइन साबित हुई थी। झील के फटने से हिंदुस्तान-तिब्बत मार्ग का बड़ा हिस्सा ढह जाने से बॉर्डर में सेना की सप्लाई प्रभावित हुई।
तब समदो बॉर्डर पहुंचने के लिए सेना और आईटीबीपी ने ग्रांफू-समदो मार्ग का इस्तेमाल किया। इसी सड़क से तब सेना का असला बारूद के साथ खाद्य सामग्री की आपूर्ति की गई। चिचम के परंगला दर्रा होकर बीआरओ लेह-लदाख बॉर्डर के लिए एक और सामरिक सड़क का निर्माण करने जा रहा है।