खीरे ने बताया कि यह पूरी परियोजना आग और भूकंप प्रतिरोधी होगी। उन्होंने कहा कि हवा का रुख मापने के लिए विशेष उपकरण भी लगाने की योजना है। भूकंप संवेदनशील इलाकों में भी उपकरण लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त विंड मानीटर सिस्टम लगाया जाएगा। ट्रेन का संचालन हवा की गति पर निर्भर करेगा।
यदि हवा की रफ्तार 30 मीटर प्रति सेकेंड से चल रही होगी तो ट्रेन का ऑपरेशन बंद कर दिया जाएगा। 508 किलोमीटर के इस ट्रैक को पूरी तरह दुर्घटना रोधी बनाया जा रहा है। यह भी व्यवस्था की जा रही है कि जरूरत पड़ने पर 8 से 10 मिनट में राहत कार घटना स्थल पर पहुंच जाए। यह ट्रेन 320 सेकेंड में 320 किमी प्रति घंटा की अधिकतम गति हासिल करेगी और इस दौरान 18 किलोमीटर यात्रा तय करेगी।
बांद्रा-कुर्ला कांप्लेक्स से 10 मिनट में पहुंचेंगे मुंबई ठाणे
बांद्रा-कुर्ला कांप्लेक्स से मुंबई ठाणे तक की दूरी महज 10 मिनट में तय होगी और पालघर जिले के विरार से 24 मिनट में पहुंचा जा सकेगा। अधिक भीड़ के दौरान पीक ऑवर में तीन ट्रेनें चलाई जाएंगी जबकि नान पीक ऑवर में दो ट्रेनें चलाने की योजना है। दोनों स्टेशनों के बीच रोजाना 70 ट्रिप चलेंगे। प्रत्येक दिशा में 35 ट्रिप चलाए जाएंगे।
अनुमान के मुताबिक रोजाना 40 हजार यात्री सफर करेंगे। उन्होंने बताया कि कम देरी के लिए रुकने वाली ट्रेनें बांद्रा-कुर्ला कांप्लेक्स, सूरत, वडोदरा, अहमदाबाद और साबरमती स्टेशनों पर रुकेंगी। खीरे ने बताया कि लांचिंग से पहले खाली ट्रेनें 10 हजार किलोमीटर परीक्षण के तौर पर चलाई जाएंगी। 10 कार ट्रेन व्यावसायिक वर्ग की होंगी जबकि नौ ट्रेन कारें स्टेंडर्ड क्लास की होंगी। 2033 के बाद ट्रेनों में 16 कारें होंगी।