प्रदेश सरकार को चंबा मेडिकल कॉलेज में कांट्रेक्ट पर तैनात प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टरों को इंसेंटिव देना मंहगा पड़ सकता है। कॉलेज में अब 25 नियमित डॉक्टरों ने भी इंसेंटिव की मांग की है। अगर इंसेंटिव न मिला तो ये डॉक्टर सामूहिक इस्तीफा भी दे सकते हैं।
हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने नियमित डॉक्टरों को भी इंसेंटिव देने की फाइल चला दी है। चंबा के अलावा नाहन, नेरचौक, हमीरपुर में भी मेडिकल कॉलेज हैं। इन कॉलेजों से भी इंसेंटिव की मांग उठ सकती है।
बताया जा रहा है कि डॉक्टर जनजातीय क्षेत्रों में सेवाएं देने को तैयार नहीं होते। ऐेसे में चंबा मेडिकल कॉलेज में कार्यरत प्रोफेसर को 50 हजार, एसोसिएट प्रोफेसर को 30 और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टरों को 20 हजार रुपये मासिक इंसेंटिव दिया जा रहा है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) आरडी धीमान का मानना है कि इस मामले को देखा जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने कहा कि फैकल्टी डॉक्टरों की कमी है। उन्होंने कहा कि नियमित कर्मचारियों को इंसेंटिव देने की फाइल अभी उनके पास आनी है।
कई नियमित डॉक्टरों का वेतन कम
इंसेंटिव देने से मेडिकल कॉलेज में कई नियमित डॉक्टरों की तनख्वाह कांट्रेक्ट डॉक्टरों से कम हो गई है। ऐसे में ये डॉक्टर इंसेंटिव पर अडे़ हैं।
एमएस और प्रधानाचार्य से उठाया है मामला
डॉक्टर एसोसिएशन चंबा के अध्यक्ष डॉ. दिलबाग ठाकुर ने बताया कि वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक से इस मामले को उठाया है। प्रधानाचार्य को भी इस बारे में पता है। अगर कांट्रेक्ट डॉक्टरों को इंसेंटिव दिया जा रहा है तो नियमित डॉक्टरों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए।