प्रदेश के राशनकार्ड उपभोक्ताओं को नवंबर में सस्ती चीनी देरी से मिल सकती है। कंपनियां चीनी के टेंडर लेने को आगे नहीं आ रही हैं। खाद्य आपूर्ति निगम ने चीनी के टेंडर आमंत्रित किए थे, इसमें मात्र दो कंपनियों ने भी सप्लाई देने की हामी भरी है।
नियमों के मुताबिक कम से कम तीन कंपनियों का टेंडर में शामिल होना आवश्यक है। खाद्य आपूर्ति निगम ने मामले प्रदेश सरकार को भेज दिया है। खाद्य आपूर्ति निगम की मानें तो उपभोक्ताओं को सस्ती चीनी देने के लिए 2 बार टेंडर कॉल कर दिए हैं।
इसमें एक से दो कंपनियां ही भाग ले रही हैं। निगम का कहना है कि अगर तीन और इससे अधिक कंपनियां चीनी के टेंडर में भाग लेती हैं तो निगम अपने स्तर पर फाइनेंशियल खोल सकता है। इससे कम कंपनियों के आवेदन आने पर निगम ने मामला सरकार को भेजा गया है।
नमक का टेंडर फाइनल
खाद्य आपूर्ति निगम ने नमक का टेंडर फाइनल कर दिया है। बाहरी राज्यों की कंपनी को टेंडर दिया गया है। कंपनी को 15 दिन के भीतर गोदामों में नमक की सप्लाई देने के आदेश दिए हैं।
खाद्य आपूर्ति मंत्री जीएस बाली का कहना है कि टेंडर में पारदर्शिता बरती जा रही है। औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही टेंडर दिए जाते हैं। अगर चीनी के टेंडर में कम कंपनियों ने आवेदन किया है। इसको देखा जाएगा।