प्रदेश में हर्बल रंग बनाने के लिए मेहंदी, अखरोट के छिलके, प्याज का वेस्ट, चीड़ की हरी पत्तियां, अनार के छिलके, हल्दी आदी से प्राकृतिक हर्बल रंग तैयार होंगे। इनमें किसी भी प्रकार के केमिकल का प्रयोग नहीं किया जाएगा।
पहले चरण में इन वस्तुओं में प्रयोग होगा हर्बल रंग
योजना के अनुसार शॉल, मफलर, स्टॉल सहित अन्य कपड़ों पर हर्बल रंग का प्रयोग किया जाएगा। योजना पहले प्रदेश में लागू होगी। इसके बाद इसे उत्तर भारतीय राज्यों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। जहां पर कपड़ों का उत्पादन होता है, उन राज्यों में यहां से रंग सप्लाई किए जाएंगे। खादी बोर्ड की जरूरत को ध्यान में रखकर भी काम किया जाएगा।
इनको मिलेगा इसका लाभ
हर्बल रंग बनाने के लिए प्रदेश हैंडीक्राफ्ट-हैंडलूम की ओर महिलाओं को रंग बनाने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग महिलाओं को समूहों में दी जाएगी। बाद में हर्बल रंग का उत्पादन कर प्रदेश की हजारों महिलाएं अपना स्वरोजगार शुरू कर सकेंगी।