हाटकोटी-पांवटा साहिब फोरलेन निर्माण के दौरान सामने आ रहे मामले
(खास खबर )
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश में पांवटा साहिब से हाटकोटी तक नेशनल हाईवे-707 के निर्माण के दौरान लगातार एनजीटी के आदेशों का उल्लंघन हो रहा है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने इस परियोजना से पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर कई बार निर्देश दिए हैं कि मलबे का उचित तरीके से निपटान किया जाए। साथ ही एनजीटी ने जलस्रोतों से मलबा हटाने के आदेश भी दिए। इसके बावजूद मलबे को अभी भी पहाड़ों की ढलानों और नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में फेंका जा रहा है, जिससे वहां के पारिस्थितिक तंत्र पर बुरा असर पड़ रहा है।
एनजीटी ने 24 जुलाई की सुनवाई में सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले मलबे को जंगलों और नदी तटों पर फेंकने पर सख्त नाराजगी जाहिर की थी। इसके बावजूद 18 अक्टूबर को मामले की अगली सुनवाई से पहले भी मलबे का अवैध निपटान जारी है। एनजीटी में दी गई रिपोर्ट के अनुसार सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस मामले में कोई एहतियाती कदम नहीं उठाए हैं। हाईवे परियोजना के निर्माण के दौरान उखाड़े गए लाखों पेड़ों और बर्बाद किए गए सैकड़ों जलस्रोतों के कारण इलाके में प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया है। मलबे की डंपिंग के कारण न केवल जंगलों और नदी के बहाव पर असर पड़ा है, बल्कि आसपास के खेत और बागवानी क्षेत्र भी प्रभावित हो रहे हैं। पानी के पारंपरिक स्रोत जैसे कूहलें और नाले, जिन पर स्थानीय लोगों का जीवन निर्भर है, वे भी इस मलबे के चलते बंद हो गए हैं। एनजीटी के आदेशों के बावजूद मलबे की डंपिंग लगातार जारी है।
एनजीटी ने अपनी पिछली सुनवाई में स्पष्ट किया था कि निर्माण कार्य से प्रभावित सभी जलस्रोतों की सफाई की जाए और मलबे को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए। इसके साथ ही परियोजना के तहत सभी प्रगति रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद न तो राजमार्ग मंत्रालय ने कोई ठोस कार्रवाई की है और न ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाई है।
स्थानीय निवासी और इस मामले के याचिकाकर्ता नाथू राम का कहना है कि अधिकारियों ने लगातार एनजीटी के आदेशों की अनदेखी की है। एनजीटी के आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है और मलबे को लगातार पहाड़ों और नदी तटों में फेंका जा रहा है। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि स्थानीय समुदायों के जीवन पर भी खतरा मंडरा रहा है।
800 पन्नों की रिपोर्ट में हुई है पर्यावरण को हुए नुकसान की पुष्टि
संयुक्त समिति जिसमें एनएचएआई, प्रदेश प्रदूषण बोर्ड, जिला प्रशासन शिमला, जिला प्रशासन सिरमौर, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, लोक निर्माण विभाग और वन विभाग शामिल हैं कि बनाई गई 800 पन्नों की रिपोर्ट में भी निर्माण कार्य में अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। इसके बावजूद मोरथ, एनएचएआई, वन विभाग और प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसे नजरअंदाज किया है।