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ऐग्रीमेंट में उलझी अवैध कटान मामले की जांच

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राजधानी के तारादेवी मंदिर के पास अवैध पेड़ कटान मामले की जांच भूमि मालिक और एक होटलियर के बीच के ऐग्रीमेंट में उलझ कर रह गई है। मालिक के मुताबिक उनकी गैर मौजूदगी में प्रवीण नाम के शख्स ने अपने नाम से इस जमीन की पैमाइश करवाई है। अब यह प्रवीण शर्मा कौन है, इस पर रहस्य बना हुआ है।
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हालांकि जमीन मालिक के बेटे ने दावा किया है कि प्रवीण हमारा नहीं बल्कि उस व्यक्ति का आदमी है जिसके साथ जमीन का सौदा किया है। पुलिस जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। मंगलवार को एसपी और एएसपी ने तारादेवी में मौके का मुआयना किया। एसएचओ बालूगंज को निर्देश दिए कि निशानदेही के लिए तुरंत आवेदन करें। जमीन की पैमाइश के बाद ही इस मामले में जांच आगे बढ़ पाएगी। बुधवार को पुलिस ने एग्रीमेंट की कॉपी के साथ भूमि मालिक को आने के लिए कहा है।

अब तक की छानबीन में कई तथ्य सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि जिस समय वारदात को अंजाम दिया गया उस वक्त इस बीट में तैनात महिला वन गार्ड प्रसूति अवकाश पर थीं। इसका अतिरिक्त कार्यभार खलीनी बीट में कार्यरत गार्ड को दे रखा था। लिहाजा आरोपियों को इसकी पक्की खबर थी कि पेड़ काटने से रोकने के लिए यहां कोई नहीं आएगा। पेड़ कटान के पीछे जिसका भी हाथ है, क्या उसकी वन महकमे में भीतर तक काफी पैठ है। यह जांच का विषय है।
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चोरी की लकड़ी कर दी मंदिर में दान

पेड़ काटने के बाद आरोपियों ने बान की लकड़ी को बाकायदा तारादेवी मंदिर में दान भी दिया है। अब यहां कौन लकड़ी के यह ढेर लगा गया इसका पुलिस पता लगा रही है। हालांकि मंदिर में रसोई गैस सिलेंडर का ही अधिकांश तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

पुलिस की जांच का दायरा पेड़ कटान मामले में केवल दो लोगों पर घूम रहा है इनमें भूमि मालिक और उस व्यवसायी पर है जिसके साथ जमीन का सौदा हुआ। तीसरे व्यक्ति को प्राइवेट लैंड से पेड़ काटने की जरूरत ही क्या थी? जबकि आसपास सारा सरकारी जंगल है। प्राइवेट लैंड से लकड़ी काटकर क्या फिर वह मंदिर में दान करता?

पुश्तैनी है ये जमीन अब मालिक परमिंद्र

राजस्व रिकार्ड में यह जमीन परमिंद्र के नाम से है। यह तब से है जब यह जगह पंजाब में होती थी। हिमाचल अलग राज्य बनने के बाद भी इस जमीन का मालिकाना हक राजस्व में परमिंद्र के नाम है। यह जमीन पुश्तैनी है। मौजूदा समय में यह परिवार गुड़गांव में रहता है। जमीन की सौदेबाजी को लेकर अमरीक सिंह नागपाल के साथ एग्रीमेंट हुआ है। यह चंडीगढ़ के एक होटल और रिजार्ट कंपनी के निदेशक बताए जा रहे हैं।

38 बीघा जमीन का सौदा करीब 16 करोड़ में हुआ। पेशगी के तौर पर तीन करोड़ भी अदा किए हैं। अगले साल मई माह तक जमीन के खरीददार को 118 की स्वीकृति के साथ-साथ अन्य औपचारिकताएं भी पूरी करने की शर्त रखी गई। तय सीमा पर अगर यह शर्तें पूरी नहीं कर पाता तो सौदा रद समझा जाएगा। एग्रीमेंट होने के बाद भूमि मालिक गुड़गांव लौट गए।

एग्रीमेंट केवल आपसी रजामंदी
जब तक जमीन की रजिस्ट्री नहीं होती तब तक इसका मालिकाना हक परमिंद्र के पास ही रहेगा। दोनों पक्षों के बीच सौदेबाजी को लेकर किया एग्रीमेंट रजामंदी से हुआ है। किसी बाहरी व्यक्ति को हिमाचल में जमीन की खरीद के लिए 118 की मंजूरी अनिवार्य है। मंजूरी मिलने के बाद ही जमीन की रजिस्ट्री खरीददार के नाम पर होना संभव है। लेकिन इस मामले में अब तक एग्रीमेंट के अलावा कोई दूसरा दस्तावेज नहीं है। न ही इसको लेकर 118 के तहत इससे पहले कोई आवेदन किया गया है।
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हम क्यों काटेंगे पेड़: फतेह सिंह

477 पेड़ किसकी शह पर और किसने काटे हैं, इसका खुलासा अब तक नहीं हो पाया है। भूमि मालिक ने पेड़ कटाने की बात से साफ इंकार कर दिया है। परमिंद्र के बेटे फतेह सिंह ने कहा कि उन्हें नहीं मालूम किसने उनकी 38 बीघा जमीन से पेड़ काटे हैं। वह भी क्यों पेड़ काटेंगे। अमरीक सिंह नागपाल से एग्रीमेंट करने के बाद वह गुड़गांव लौट गए थे। मीडिया में खबरें आने के बाद ही उन्हें इस बात की जानकारी मिली। प्रवीण शर्मा, अमरीक सिंह नागपाल का ही आदमी है। वह तो प्रवीण को जानते तक नहीं। पुलिस को लिखित में दी गई शिकायत में कहा है कि इस मामले की जांच करें।

हर पहलू की कर रहे जांच : एएसपी
एएसपी भजन देव नेगी ने कहा कि भूमि मालिक की ओर से एफआईआर दर्ज करने के लिए दी दरख्वास्त का कोई मतलब नहीं है। इस मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज हुई उसी में हर पहलू पर जांच की जा रही है। बुधवार को जमीन सौदे का एग्रीमेंट पेश करने के लिए कहा गया है। जमीन की निशानदेही के बाद आगामी छानबीन अमल में लाई जाएगी।
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