हिमाचल प्रदेश में बेनामी संपत्ति के मामलों को जिला प्रशासन दबाए बैठे हैं। सरकार के बार-बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद बेनामी संपत्तियों की जांच नहीं की जा रही। आखिर क्या कारण हैं कि जिले स्तर पर जांच करके सरकार को रिपोर्ट नहीं भेजी जा रही। स्थानीय स्तर पर ऐसे कौन लोग हैं, जिन्हें प्रशासनिक अधिकारी बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार शिमला, सोलन, कुल्लू और मंडी में सबसे अधिक बेनामी प्रॉपर्टी खरीदी गई है। हिमाचल के बाहर के लोगों ने भी बड़े पैमाने पर बेनामी संपत्तियां खरीदी हैं। इसमें नेताओं से लेकर नौकरशाहों तक की संपत्तियां शामिल हैं। हालांकि छुटपुट तरीके से कई मामले प्रकाश में भी आते रहे हैं, लेकिन कभी भी पूरी रिपोर्ट तैयार नहीं की गई।
इसी के मद्देनजर राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर के निर्देश पर प्रदेश के सभी उपायुक्तों से बेनामी प्रॉपर्टी की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई थी, लेकिन चार माह गुजरने के बावजूद किसी भी जिले से रिपोर्ट सरकार को नहीं भेजी गई है। यहां तक कि सभी जिलों के उपायुक्तों को दो बार रिमाइंडर भी भेजा जा चुका है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर सरकार के आदेशों की अनदेखी की जा रही है।
सभी जिलों के उपायुक्तों की ओर से बेनामी संपत्ति की जांच करके रिपोर्ट तलब की गई थी, लेकिन अभी तक किसी जिले ने रिपोर्ट नहीं भेजी है। निश्चित तौर पर यह गंभीर मामला है। सरकार जल्द ही सख्त कदम उठाएगी।
-कौल सिंह ठाकुर, राजस्व मंत्री, हिमाचल प्रदेश