राजधानी में सड़क किनारे लगी येलो लाइनों पर कुछ कई गाड़ी मालिकों ने महीनों से कब्जा कर रखा है। इन जगहों पर गाड़ियां निशुल्क खड़ी होती है। येलो लाइन को लगाने का मकसद लोगों को कुछ घंटे गाड़ी खड़ी करने की सुविधा देना है कि वह गाड़ी खड़ी करें और अपना काम करके लौट जाएं।
लेकिन ज्यादातर जगहों पर गाड़ी मालिकों ने येलो लाइन को अपनी मलकीयत ही समझ रखा है। यहां महीनों से गाड़ियां खड़ी कर रखी हैं। इस वजह से जरूरतमंद लोग पार्किंग सुविधाओं से वंचित है। मजबूरन उन्हें सड़क की दूसरी तरफ गाड़ियों को खड़ा करना पड़ रहा है। यहां पुलिस उनकी गाड़ी के चालान काट देती है या फिर क्रेन से उठा ले जाती है।
शहर में पर्याप्त पार्किंग स्थल न होने से इस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अब लोग गाड़ी खड़ी करें तो कहां? हालांकि पुलिस प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि अगर ऐसा कोई व्यक्ति जिसकी गाड़ी कई दिनों और महीनों से एक ही जगह पर खड़ी है तो इस तरह के मामले उनके ध्यान में लाए जाए वह उचित कार्रवाई करेंगे।
बावजूद इसके येलो लाइन से ऐसी गाड़ियां टस से मस नहीं हो रही है। आलम यह है कि येलो लाइन के भीतर खड़ी इन गाड़ियों के शीशों पर धूल की मोटी-मोटी परतें जम चुकी हैं। ऐसे में शिमला शहर काम के लिए आने वाले लोगों को गाड़ियां खड़ी करने को जगह नहीं मिलती।