शोध पर काम अगस्त 2023 में शुरू हुआ था
शोधपत्र का प्रारंभिक संस्करण 14 जनवरी 2026 को आर्काइव पर जारी किया गया था। इस शोध पर काम अगस्त 2023 में शुरू हुआ था। अब शोधकर्ता मॉडल की सटीकता बढ़ाने और बड़े डेटासेट पर इसका परीक्षण करने में जुटे हैं। एआई मॉडल को खोपड़ी की एक्सरे और संबंधित चेहरे की तस्वीरों के उदाहरणों से प्रशिक्षित किया गया है। यह तस्वीरों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर उनके आकार, बनावट और आपसी संबंधों का विश्लेषण करता है। इसके बाद दोनों तरह की तस्वीरों में समानताएं तलाशकर संभावित चेहरों को प्राथमिकता के क्रम में रखता है। इस तकनीक में ग्राफ न्यूरल नेटवर्क और दो विशेष प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया गया है, जिन्हें क्रॉस-अटेंशन और ऑप्टिमल ट्रांसपोर्ट कहा जाता है। इनका काम खोपड़ी और चेहरे की तस्वीरों में मौजूद संबंधित विशेषताओं को आपस में जोड़कर तुलना बेहतर बनाना है। पारंपरिक तरीके में फॉरेंसिक विशेषज्ञ खोपड़ी के आधार पर मिट्टी से चेहरे की आकृति तैयार कर सकते हैं।
भारतीय खोपड़ी और चेहरे की 102 जोड़ियों पर परीक्षण
आईआईटी मंडी के भारतीय खोपड़ी-चेहरा डेटासेट में 102 जोड़ियां शामिल हैं। इनमें खोपड़ी की एक्सरे और संबंधित चेहरे की तस्वीरें हैं। परीक्षण में मॉडल ने 50 प्रतिशत मामलों में सही चेहरे को पहली रैंक पर रखा। वहीं, 72 प्रतिशत मामलों में सही चेहरा शीर्ष पांच संभावित विकल्पों में शामिल था। शोधकर्ताओं ने चीनी चेहरे के स्केच और तस्वीरों के 188 जोड़ों वाले डेटासेट पर भी परीक्षण किया। इसमें सही चेहरे को पहली रैंक पर रखने की दर 88.4 प्रतिशत और शीर्ष पांच में सही चेहरा मिलने की दर 89 प्रतिशत रही। दोनों डेटासेट के परिणामों में अंतर से पता चलता है कि खोपड़ी और चेहरे के बीच मिलान करना स्केच और चेहरे की तुलना से अधिक चुनौतीपूर्ण है।
कोट बड़े डेटासेट पर होगा परीक्षण
भारत की आबादी में विविधता को देखते हुए भारतीय लोगों की खोपड़ी और चेहरे से जुड़े बड़े डेटासेट तैयार करना महत्वपूर्ण है। आगे मॉडल की सटीकता सुधारने और अधिक विविध आंकड़ों पर इसकी जांच करने पर काम किया जा रहा है। फिलहाल इसका परीक्षण शोध के स्तर पर डेटासेट के माध्यम से हुआ है। वास्तविक आपराधिक मामलों में इसकी उपयोगिता और विश्वसनीयता साबित करने के लिए आगे परीक्षण जरूरी हैं। -डॉ. दिनेश सिंह, सहायक प्रोफेसर आईआईटी मंडी