राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तरी रेलवे से देश के दो भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों को रेल सुविधा न मिलने पर जवाब मांगा है। देश के 23 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में से दो संस्थान अभी रेल सुविधा से नहीं जुड़े हैं। प्रदेश के आरटीआई एक्टीविस्ट सुजीत स्वामी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दी थी।
इसमें यहां कार्य कर रहे कर्मचारियों और स्टूडेंट्स की समस्या उठाई थी। आईआईटी मंडी और रोपड़ को अभी रेलवे सुविधा नहीं मिली है। सुजीत स्वामी ने हिमाचल में नई रेलवे लाइन जोगिंद्रनगर-बिलासपुर वाया मंडी के कार्य की रिपोर्ट आरटीआई में मांगी थी। फरवरी 2017 में रेलवे ने 31 जून, 2017 तक सर्वे पूरा होने का जवाब दिया था।
लेकिन सर्वे अभी तक पूरा नहीं हो सका है। इसके बाद पीएमओ कार्यालय से पत्राचार किया गया। वहां से मिले निर्देशों के आधार पर पर उत्तरी रेलवे ने आरटीआई एक्टीविस्ट को 15 जून को एक बार सूचना दी कि इस वर्ष लाइन के सर्वे को पूरा किया जाएगा। इससे रेलवे के कार्य पर सवाल उठ रहे हैं।
आठ वर्ष बाद भी सर्वे के फेर में रेलवे
बिलासपुर-मंडी-मनाली-लेह-लद्दाख रेल लाइन का सर्वे 2009-10 में शुरू हुआ था। लगभग आठ वर्ष बीतने के बाद भी सर्वे चल रहा है। नई पठानकोट-जोगिंद्रनगर मंडी रेललाइन का सर्वे भी चला हुआ है। इससे सवाल उठ रहा है यदि रेलवे को सर्वे में इतना समय लग रहा है तो लाइन बिछाने में कितना समय लगेगा।
अलग-अलग सूचना दे रहा रेलवे: सुजीत
आटीआई एक्टीविस्ट सुजीत स्वामी ने कहा कि रेलवे इतने सालों में सर्वे पूरा नहीं कर पाया है। इससे हिमाचल में रेलवे का विस्तार नहीं हो रहा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखा, जिस पर रेलवे से आयोग ने जवाब मांगा था। वहीं, दो अलग-अलग आरटीआई के जवाब सर्वे पूरा होने की रेलवे तय तारीख नहीं बता रहा है। फरवरी में मिले जवाब में 31 जून तक सर्वे पूरा करने का दावा किया था। अप्रैल में पीएमओ कार्यालय को सूचना दी गई तो इसके बाद रेलवे ने जवाब दिया कि इस साल सर्वे पूरा कर लिया जाएगा।
सर्वे कार्य को मिली गति: रामस्वरूप
मंडी के सांसद रामस्वरूप शर्मा ने कहा कि सांसद शांता कुमार के साथ मिलकर रक्षा मंत्री तथा रेल मंत्री से रेल लाइन के सर्वे के कार्य में गति लाने की मांग उठाई गई है। रेललाइन के निर्माण को सर्वे के कई चरण होते हैं। कार्यों को गत वर्षों की अपेक्षा गति दी गई है।