विभागाध्यक्ष डॉ. राम लाल ने बताया कि जिन लोगों को यह आंखें लगाई जाती हैं उनका प्रत्यारोपण मुफ्त में किया जाता है। इस पूरे ऑपरेशन में करीब डेढ़ घंटे का समय लगता है। हालांकि मृत व्यक्ति की आंखें निकालने के दौरान उसके ब्लड एचआईवी व अन्य गंभीर बीमारियों के टेस्ट किए जाते हैं। अगर इन टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तब मरीज को यह आंखें नहीं लगाई जाती हैं।
कुछ घंटों के भीतर आंखें निकालनी पड़ती है
डॉक्टरों के मुताबिक व्यक्ति के मरने कुछ घंटों के भीतर के यह आंखें निकालनी होती है। इसके लिए डॉक्टरों की टीम अस्पताल या व्यक्ति के घर जाकर आंखें निकालती है और उसकी जगह कृत्रिम आंखें लगाई जाती हैं। इसके अलावा निकाली गई आंखों से चार से सात दिनों तक सुरक्षित रखती हैं। इस दौरान जिस मरीज को आंखों की जरूरत होती है उन्हें प्रत्यारोपण किया जाता है।