इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में कार्यरत सैकड़ों कर्मचारियों के तनख्वाह और अन्य रूटीन बिलों को अब नहीं रोका जाएगा। सोमवार को आईजीएमसी में कॉलेज प्राचार्य डॉ. सीता ठाकुर की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। प्राचार्य ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोई भी किसी भी अधिकारी के काम में दखल नहीं देगा।
आईजीएमसी में आउटसोर्स, चतुर्थ श्रेणी और लोकमित्र कर्मचारियों के वेतन संबंधी मामले लटके पड़े हैं। कुछ कर्मियों को दो माह से तनख्वाह नहीं मिली है। इसके अलावा कंपनियों के बिल भी रोके जा रहे हैं। ऐसे में कंपनी के तहत रखे गए कर्मियों को मानदेय समय पर नहीं मिल रहा। कंपनी और कर्मचारियों को पेश आ रही परेशानी की शिकायत कॉलेज प्राचार्य तथाएमएस का पदभार संभाल रही डॉ. सीता ठाकुर से की थी। इसके बाद सोमवार सुबह ग्यारह बजे अस्पताल के कमेटी हॉल में बैठक हुई। इसमें इन मुद्दों को लेकर चर्चा की गई।
बैठक में प्राचार्य ने दो टूक कहा है कि जिस अधिकारी को जो काम सौंपे हैं वह उन कार्यों को ही संभालेंगे। बैठक में आईजीएमसी के डिप्टी एमएस का पदभार संभाल रहे डॉ. प्रवीण भाटिया, अस्पताल एडमिनस्ट्रेशन डॉ. राहुल रॉव, डॉ. राहुल गुप्ता, डॉ. साद रिजवी, डॉ. शोमिन धीमान, एसीएफ प्रणव और विभिन्न विभागों के कर्मचारी मौजूद रहे।
परिसर में बाहर बना दी दुकान
आईजीएमसी परिसर के बाहर पार्किंग के पास दो दुकानें बनाने का मामला सामने आया है। यह दुकानें किसे सौंपी जाएंगी इसका अभी फैसला नहीं हो पाया है।