वहीं, म्यूरेट ऑफ पोटाश खाद सोमवार को चंडीगढ़ पहुंच गई। वहां से इसे ट्रकों में सीधे हिमफेड के स्टोरों और डिपो के लिए रवाना कर दिया गया है। यह जानकारी हिमफेड के अध्यक्ष गणेश दत्त ने दी है। सेब बगीचों में खाद संकट के बीच जॉर्डन ये आयातित यह खाद आखिर प्रदेश में पहुंच ही गई। इस खाद को जनवरी में मंगवा दिया गया था, मगर नहीं पहुंची थी। मंगलवार के बाद यह हिमफेड के डिपो में मिलना शुरू हो सकती है। म्यूरेट ऑफ पोटाश खाद जॉर्डन और इस्रायल के बीच डेड सी या इस तरह के स्रोतों से खोदकर निकाली जाती है।
इसके रेट 1050 से बढ़ाकर 1700 रुपये हो गए हैं। इनकी कीमतें बढ़ने के कारण विदेशों से इसे कम मात्रा में मंगवाया जा रहा है। इसी से हिमाचल में भी संकट पैदा हो गया। इस खाद की जरूरत फरवरी महीने में ही ज्यादा होती है। निचले क्षेत्रों में तो यह फरवरी के पहले और दूसरे सप्ताह में ही डाली जाती है। इन क्षेत्रों में निर्धारित समय भी निकल गया है। हिमफेड के अध्यक्ष गणेश दत्त ने कहा कि चंडीगढ़ में खाद पहुंचने के बाद इसे स्टोरों और डिपो के लिए रवाना कर दिया गया है।