हिमाचल के शहरों में प्लास्टिक कचरा फैलाना अब अपराध की श्रेणी में आएगा। ऐसा करने वाले व्यक्ति को 3 माह की जेल या 25 हजार रुपये जुर्माना या दोनों सजाएं एक साथ हो सकती हैं। हाईकोर्ट के निर्देश पर सभी नगर परिषदें और नगर पंचायतें इस बारे में नए बाइलॉज बना रही हैं।
ये बाइलॉज पॉलीथिन नहीं, बल्कि प्लास्टिक पैक्ड वस्तुओं और कैरी बैग को लेकर होंगे। हाईकोर्ट ने 33 प्रकार की वस्तुओं की पैकिंग के प्लास्टिक को खुले में फेंकने के खिलाफ कानून बनाने को कहा था। इसमें मैगी, कुरकुरे से लेकर कपड़े की पैकिंग तक शामिल है।
इसी आदेश का पालन करते हुए अब सभी शहरी निकाय प्लास्टिक वेस्ट (मैनेजमेंट एंड हैंडलिंग) बाइलॉज 2014 का प्रारूप अधिसूचित कर रहे हैं। इन पर आम लोगों से आपत्तियां एवं सुझाव मांगे जा रहे हैं। जून महीने के अंत तक इसकी अधिसूचना जारी हो जाएगी।
इनमें ये प्रावधान है कि शहरी निकायों को अपने यहां उपभोक्ता वस्तुओं के प्रयोग के बाद पैदा होने वाले प्लास्टिक वेस्ट का आकलन करना होगा। इसकी सेगरिगेशन के लिए हर शहरी निकाय को हेल्थ ऑफिसर, ईओ या सचिव की अध्यक्षता में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर बनाना होगा। यह केंद्र कचरा एकत्र करने वाले लोगों और किसी अन्य एजेंसी की मदद भी ले सकता है।
शहर में प्लास्टिक को खुला फेंकने या जलाने पर प्रतिबंध होगा। साल के शुरू में शहरी निकाय को वेस्ट ऑडिट करना होगा। बाइलॉज में प्रावधान है कि पेनल्टी हिमाचल नॉन बायोडीग्रेडेबल गारबेज एक्ट 1995 की धारा 8(1) के तहत दी जाएगी, जबकि कंपाउंडिंग धारा 11 के प्रावधानों के मुताबिक होगी।
नए कानून में कैरी बैग निर्माता भी जवाबदेह
शहरी विकास विभाग के निदेशक कैप्टन जेएम पठानिया कहते हैं कि अब तक शहरी निकायों में प्लास्टिक वेस्ट पर कार्रवाई करने के लिए कोई कानून नहीं था। अब कचरा फैलाने वालों के साथ साथ इसके निर्माताओं की भी जवाबदेही तय होगी। उन्हें नोटिस देकर पूछा जा सकेगा कि वे इसे रोकने के लिए अपने स्तर पर क्या कर रहे हैं? चालान का अधिकार सभी जिला अफसरों को पहले ही दे दिए हैं।
दुकानदार भी होंगे जिम्मेदार
सार्वजनिक स्थलों पर प्लास्टिक कचरा फेंकने वाले और जिनके परिसरों या दुकानों के बाहर कचरा मिलेगा, वे इसके लिए जिम्मेदार होंगे। कचरा फेंकने वालों का चालान तहसीलदार से लेकर एसडीएम तक मौके पर ही कर सकेंगे।