शोध पर एक करोड़ से अधिक का बजट खर्च
ओमान के मिडिल ईस्ट कॉलेज मस्कट ने जनवरी 2020 में इस विषय पर शोध के लिए विशेषज्ञों को प्रोजेक्ट सौंपा था। डेढ़ वर्ष तक शोध के बाद जुलाई 2021 में पेटेंट के लिए भारत और आस्ट्रेलिया की सरकार को आवेदन किया। आस्ट्रेलिया की सरकार ने वर्ष 2021 में पेटेंट मंजूर कर दिया, जबकि भारत सरकार ने कुछ माह पूर्व इसे मंजूरी दी है। भारतीय प्रबंधन संस्थान मुंबई के डाॅक्टर आरिफ, एनआईटी हमीरपुर के सह प्राध्यापक मोहम्मद आदिल, ओमान के मिडिल ईस्ट कॉलेज मस्कट के सहायक प्राध्यापक अश्द उल्लाह ने यह आविष्कार किया है। इस प्रोजेक्ट पर एक करोड़ से अधिक का खर्च हुआ है।
ये है ब्लाॅक चेन और हायपर लेजर तकनीक
सहायक प्राध्यापक मोहम्मद आदिल ने कहा कि हाइपर लेजर एक ओपन सोर्स ब्लॉक चेन फ्रेमवर्क है। इसमें व्यवसायों, सरकारों और संस्थानों को सुरक्षित लेनदेन की सुविधा मिलती है, जो कि डिजिटल फार्म में सुरक्षित होते हैं। ब्लॉक चेन तकनीक स्पेयर पार्ट्स डाटा को अपने डाटाबेस में सुरक्षित रखती है। इससे कलपुर्जे के जीवन चक्र में विमान स्पेयर पार्ट्स में होने वाले परिवर्तनों को आसानी से ट्रैक और मॉनिटर किया जा सकता है। पुर्जा कंडम होते ही एयरक्राफ्ट ऑपरेटर, लॉजिस्टिक प्रोवाइडर, मेंटेनेंस रिपेयर ऑपरेटर और रेगुलेटरी बॉडी को मैसेज जाएगा। यह रियल टाइम अलर्ट पुर्जा बदले जाने तक ट्रैक किया जा सकेगा।