हड़ताल के बाद शुक्रवार को आढ़तियों ने मंडियां खोल दीं और बागवानों का सेब गड़ (पेटी) के हिसाब से बेचा गया। शिमला की भट्ठाकुफर और ठियोग की पराला मंडी में आढ़ती खुलेआम किलो के स्थान पर पेटी की बोली लगाते दिखे। सरकार की ओर से किलो के आधार पर सेब बेचने को लेकर जारी अधिसूचना की अवहेलना पर एपीएमसी ने नियमों का उल्लंघन कर रहे आढ़तियों को नोटिस जारी किए हैं। मुख्यमंत्री से वीरवार रात मुलाकात के बाद आढ़तियों ने हड़ताल खत्म करने का एलान कर दिया था। दावा किया था कि मुख्यमंत्री ने बागवानों की मर्जी से किलो अथवा गड़ के आधार पर सेब बेचने का आश्वासन दिया है।
हालांकि शुक्रवार सुबह मीडिया से बात करते हुए बागवानी एवं राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने साफ किया कि बैठक में वह भी मौजूद थे और आढ़तियों को ऐसी कोई छूट नहीं दी है। नेगी ने एपीएमसी अधिकारियों को मंडियों का निरीक्षण कर रिपोर्ट देने के भी निर्देश दिए। शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में भी आढ़तियाें को छूट के विषय में कोई जिक्र नहीं किया गया। शुक्रवार को मंडियों में सेब बेचने पहुंचे बागवान किलो के स्थान पर पेटी के आधार पर सेब बिकने से मायूस नजर आए। बागवानों ने बताया कि पहले जब उनका सेब किलो के हिसाब से बिक रहा था तो अच्छे दाम मिल रहे थे पेटी के आधार पर सेब बिकने से सही दाम नहीं मिले। एपीएमसी के सचिव देवराज कश्यप ने बताया कि सरकार की ओर से किलो के हिसाब से सेब बेचने को लेकर जारी अधिसूचना का उल्लंघन करने वाले आढ़तियों को नोटिस जारी किए हैं। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार बरते सख्तीः बागवान
जैस के बागवान ज्ञान हेट्टा ने कहा कि पिछले हफ्ते टाइडमैन सेब की 22 किलो की पेटी 2600 में बिकी थी। शुक्रवार से आढ़तियों ने पेटी के हिसाब में सेब बेचना शुरू कर दिया है। अब इनकी मनमानी चलेगी। शोषण के खिलाफ सरकार कड़ाई बरते।
आढ़तियों की पैरवी न करें सीएम बागवानों से किया वादा याद रखें
संयुक्त किसान मंच ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से आढ़तियों की पैरवी न करने और बागवानों से किया वादा याद रखने का आग्रह किया है। मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान ने कहा है कि मुख्यमंत्री और आढ़तियों की बैठक के बाद जो बयान आया है उससे बागवान आहत हैं। बागवानों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है। शुक्रवार को कुछ आढ़तियों ने एपीएमसी एक्ट के प्रावधानों को ताक पर रखकर खुलेआम पेटी के आधार पर सेब बेचा, हालांकि बागवानी मंत्री ने अपने बयान में साफ किया है कि मंडियों में सेब सरकार की अधिसूचना के अनुसार किलो के हिसाब से ही बिकेगा। मंच ने बागवानी मंत्री के बयान का स्वागत किया है और मंत्री के साथ चट्टान की तरह खड़े रहने का एलान किया है लेकिन अगर मुख्यमंत्री आढ़तियों के हितों की पैरवी करेंगे तो सड़क पर उतरने से भी गुरेज नहीं किया जाएगा। मंच ने इस मुद्दे पर आंदोलन की रणनीति बनानी भी शुरू कर दी है।
किसान विरोधी साबित हुए सीएम : सोहन
सेब उत्पादक संघ के प्रदेशाध्यक्ष सोहन सिंह ठाकुर ने कहा है कि किसानों-बागवानों के हितों को दरकिनार कर आढ़तियों के पक्ष में फैसला लेने वाले मुख्यमंत्री किसान विरोधी साबित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने फैसला लेने से पहले न तो बागवानी मंत्री को विश्वास में लिया न ही किसान बागवान संगठनों को। जगत सिंह नेगी पहले बागवानी मंत्री हैं जो किसान बागवान हित में कड़े फैसले ले रहे हैं। मौजूदा मुख्यमंत्री पूर्व मुख्यमंत्री की राह पर चल रहे हैं जो की सही नहीं है।
पराला मंडी में 3350 रूपये बिका स्पर वैरायटी का सेब
जिला शिमला, किन्नौर और कुल्लू के हजारों बागवानों को लाभान्वित करने वाली पराला मंडी सेब सीजन धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ने लगी है। मंडी में ठियोग के निचले इलाकों से सेब आना शुरू हुआ है। शुक्रवार को मंडी पहुंचा स्कॉरलेट स्पर वैरायटी का सेब 3,350 रुपये प्रति पेटी रेट पर बिका। सेब के बेहतर दाम मिलने से बागवानों के चेहरों पर खुशी की लहर है। पराला मंडी के एचएफए फर्म के आक्शन यार्ड पर पेटियां खुलते ही सेब की चमक और आकार देखकर खरीददारों का तांता लग गया।
स्कॉरलेट स्पर वैरायटी के सेब की 2100 से बोली की शुरुआत हुई और देखते की देखते बोली 3,350 रुपये तक पहुंच गई। गाला वैरायटी का सेब 2100 रुपये प्रति पेटी बिका। ठियोग के बागवान रामलाल शर्मा ने बताया कि टियाली के शई में स्थित उनके बगीचे में स्पर की सुपर चीफ, स्कारलेट स्पर, रेड विलोक्स, जेरोमाइन सहित 12 किस्म के पौधे हैं। पॉलीनेशन के लिए गेल गाला, पिंक लेडी, समर क्वीन किस्म लगाई हैं। इनकी 6 पेटियां गाला, 2100 और 34 पेटियां स्कॉरलेट स्पर 3,350 रुपये प्रति बॉक्स सेब के दाम मिले हैं।