पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू ने पत्रकारों को संबोधित किया।
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नशे के खिलाफ पुलिस की मुहिम में अब बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू के अनुसार एनडीपीएस के बड़े मामलों में पुलिस छानबीन कर मुख्य माफिया तक पहुंचने में कामयाब रही है। ऐसे 10 मामले पुलिस ने वित्तीय जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय को भेजे हैं। इन मामलों में चिह्नित बड़े 10 माफिया की कुल संपत्ति 13.50 करोड़ की है।
डीजीपी कुंडू ने कहा कि इस बात की भी जांच होगी कि इस संपत्ति को माफिया ने किस माध्यम से बनाया है। अगर यह नशा बेचकर ही बनी है तो इसे जब्त करने की भी सिफारिश की है। उन्होंने बताया कि पठानकोट बॉर्डर से सबसे ज्यादा नशा हिमाचल प्रदेश में पहुंचता था।
इसके लिए ही विशेष तौर पर नूरपुर में थाना बनाया गया, ताकि नशे को बॉर्डर पर रोका जा सके। कहा कि नशा माफिया को एकदम खत्म करना संभव नहीं है, लेकिन मुश्किल भी नहीं है। इसके लिए प्रदेश पुलिस का कार्य सराहनीय है। कुंडू ने प्रदेश की फार्मा कंपनियों में चिट्टा और अन्य मादक पदार्थ बनने के सवाल पर जवाब देते हुए कहा कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट में कार्रवाई करने के लिए ड्रग कंट्रोलर को ही शक्तियां हैं।
फार्मेसी कंपनियां क्या बना रहीं हैं, इसकी पुलिस सीधे तौर पर छानबीन नहीं कर सकती है। इसके लिए पुलिस को ड्रग कंट्रोलर साथ में ले जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अच्छी बात है कि हमने सरकार से आग्रह कर ड्रग कंट्रोलर प्रतिनियुक्ति पर लिया है। आज के दिन में जितनी भी ड्रग फैक्टरी हैं उनका निरीक्षण हो रहा है। ट्रामाडोल समेत कई अवैध दवाइयों को जब्त किया है। इस गैर कानूनी धंधे से जो अवैध संपत्ति बनी है उसे भी सीज करने की प्रक्रिया जारी है।