मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर बोर्ड (आईडीबी) ने आठ शहरों के पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड के प्रस्ताव लौटा दिए हैं। शहरी विकास विभाग ने डेढ़ महीने की मेहनत के बाद इन्हें तैयार किया था।
आईडीबी की अनुमति के बाद ये विज्ञापित किए जाने थे, लेकिन प्रधान सचिव वित्त की सलाह के आधार पर बोर्ड ने इन प्रोजेक्टों को पीपीपी के बजाय लीज आधार पर करने की सलाह दी है। लीज पर काम करने से शहरी विकास विभाग सहमत नहीं है, क्योंकि इससे शहरी निकायों को कोई फायदा नहीं होगा।
प्रोजेक्ट क्लीयर करने के लिए आईडीबी की बैठक पिछले शनिवार को थी। अन्य विभागों के मसले भी इसमें रखे गए। शहरी विकास विभाग ने 8 शहरों के प्रोजेक्ट रखे।
इसमें धर्मशाला के दो प्रोजेक्ट शहर के इंडियन कॉफी हाउस और पार्क कैफे को पीपीपी मोड पर देने का था। ज्वालामुखी बस अड्डे के सामने पड़ी खाली जमीन पर शापिंग कांप्लेक्स बनना था।
सुंदरनगर, चुवाड़ी, नूरपुर, डलहौजी और नाहन में पार्किंग एवं शापिंग कांप्लेक्स बनने थे। लेकिन ये सब अब खटाई में पड़ गए हैं। विभाग इसलिए पीपीपी मोड में जा रहा था, क्योंकि इन विकास योजनाओं के लिए न तो नगर परिषदों के पास पैसा है, न ही राज्य सरकार के पास फंडिंग का कोई इंतजाम है।
शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा के अनुसार उन्हें अभी आईडीबी में हुए फैसले की आधिकारिक जानकारी नहीं है, लेकिन आज का जमाना पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप का है।
शहरों में कई प्रोजेक्ट पीपीपी से करवाए जा सकते हैं, इसलिए हम विभाग के भीतर ही पीपीपी सेल बनाने की सोच रहे हैं। अन्य अहम विभागों के अधिकारी इस सेल में लिए जाएंगे।