प्रधान सलाहाकार निशा सिंह (प्रशासनिक सुधार एवं प्रशिक्षण )
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हिमाचल प्रदेश की वरिष्ठ अफसरशाही के बीच चल रहा शीत युद्ध अब खुलकर सामने आ गया है। वरिष्ठ आईएएस अफसरों को नजरअंदाज कर जूनियर अधिकारी को मुख्य सचिव (सीएस) नियुक्त करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। पूर्व मुख्य सचिव रामसुभग सिंह की पत्नी एवं प्रधान सलाहकार निशा सिंह के नाम से एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने सीएस आरडी धीमान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री को लिखे इस पत्र में कामकाज के बंटवारे पर भी निशा सिंह ने नाखुशी जताई है। पत्र में लिखा है कि मेरे पद का मजाक बनाकर रख दिया है, सीएस धीमान मुझसे जूनियर हैं और उनका अनुभव भी मेरी तुलना में कम है।
जूनियर अधिकारी को मुख्य सचिव नियुक्त करने पर आपत्ति जताने वाले निशा सिंह के इस वायरल पत्र को लेकर शुक्रवार को प्रदेश की अफसरशाही में दिनभर चर्चा होती रही। प्रधान सलाहकार (प्रशासनिक सुधार एवं प्रशिक्षण) निशा सिंह ने राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा है कि मुख्यमंत्री के सलाहकारों ने उन्हें गुमराह किया है। प्रशासन ने बेहद कठोर, असंवेदनशील और अयोग्य रवैया अपनाया है।
निशा सिंह ने 14 जुलाई 2022 का जिक्र करते हुए कहा कि मुझसे जूनियर अफसर को सीएस के पद पर तैनात कर दिया। इसके पीछे भी सरकार की ओर से कोई ठोस कारण नहीं बताए गए। इसके बावजूद मैं अपनी ड्यूटी पूरी कर्तव्यनिष्ठा के साथ करती रही। इस समय प्रदेश में आम जनमानस, स्वयं सहायता समूह, पशुपालन और वानिकी विभाग आदि तमाम बड़ी समस्याओं से जूझ रहा है। मैंने इन सबके समाधान के लिए सकारात्मक रुख अपनाया। सरकार से मैंने अपने काम को लेकर जानकारी मांगी थी, लेकिन उसका भी जवाब संतोषजनक नहीं मिला। किसी प्रशासनिक पदानुक्रम या विभाग का हवाला नहीं दिया, जो मुझे रिपोर्ट करेंगे।
निशा सिंह ने पत्र में लिखा है कि आईएएस एसोसिएशन की अध्यक्ष होने के नाते मेरे पास ऐसी कई आईएएस और एचएएस महिला अधिकारी अपनी समस्याएं लेकर आती हैं, जिनके साथ अन्याय हो रहा है। मैंने उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास किए। यदि महिलाओं के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रवैया और न्याय नहीं है तो महिला अधिकारी और आम महिलाएं कहां जाएं। वायरल पत्र में निशा सिंह ने अंत में लिखा है कि इस मामले को लेकर मैं अंतिम फैसला मुख्यमंत्री के विवेक पर छोड़ती हूं।