नौ माह पहले वीरभद्र सरकार के सत्ताच्युत होने के बाद तक 1983 बैच के आईएएस अधिकारी वीसी फारका मुख्य सचिव थे। उन्हें वीरभद्र सरकार में कई अधिकारियों को सुपरसीड कर सीएस बनाया गया था। जयराम सरकार ने उन्हें इस पद से हटाकर विनीत चौधरी को मुख्य सचिव बना दिया। चौधरी 1982 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी थे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के साथ भी विनीत चौधरी के अच्छे संबंध हैं।
विनीत चौधरी की सेवानिवृत्ति तक यह कयास लगाए जा रहे थे कि अगर नड्डा की चली तो बीके अग्रवाल से वरिष्ठ 1983 बैच की आईएएस अधिकारी उपमा चौधरी भी मुख्य सचिव हो सकती हैं। उपमा विनीत चौधरी की पत्नी हैं, मगर वह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से नहीं लौट सकीं। हालांकि, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की पसंद शुरू से ही बीके अग्रवाल और डा. श्रीकांत बाल्दी माने जा रहे थे।
जयराम फ्री हैंड चाह रहे थे, जिससे कि निर्णय लेने में बाहरी हस्तक्षेप न रहे। अग्रवाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भी पसंदीदा माने जाते हैं। 1985 बैच के अधिकारियों में वह बाल्दी से वरिष्ठ हैं। राज्य में मौजूद अधिकारियों में केवल वीसी फारका ही अग्रवाल से वरिष्ठ थे। अग्रवाल की छवि एक चुस्त और ईमानदार अधिकारी की भी है। आखिर जयराम सरकार ने उनको मुख्य सचिव बना लिया।
बीके अग्रवाल को सिरमौर जिले के दुर्गम क्षेत्र पच्छाद में 1985 में पहली पोस्टिंग सहायक आयुक्त होने के बाद उन्हें दुर्गम क्षेत्र आनी में तैनाती मिली। इसके बाद एक साल एडीसी कांगड़ा रहे। फिर आयुक्त परिवहन और पर्यटन नियुक्त किए गए।
तीन साल डीसी ऊना और दो साल डीसी कांगड़ा रहे। फिर मंडलायुक्त कांगड़ा का भी जिम्मा संभाला। फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में पांच साल तक लखनऊ में सेवाएं दीं। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय में संयुक्त सचिव भी रहे।