लॉकडाउन में मजदूरों के पलायन से बिलासपुर की बंदलाधार में निर्माणाधीन राजकीय हाईड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज के भवन का काम लटक गया है। ऐसे में इस बार बिलासपुर में कक्षाएं शुरू करने की योजना पर संकट है। कॉलेज के मुख्य प्रशासनिक ब्लॉक का कार्य चल रहा है और यदि मजदूर जल्द लौटते हैं तो दिसंबर माह तक यह कार्य पूर्ण होने की उम्मीद है। बंदलाधार पर चयनित 62 बीघा जमीन पर एनटीपीसी व एनएचपीसी की संयुक्त भागीदारी से बनने वाले हाईड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज भवन और अन्य आधारभूत ढांचे का निर्माण किया जा रहा है। एनपीसीसी ने चेन्नई की टीएसके इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी को निर्माण का जिम्मा सौंपा है और दो साल में काम पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है, लेकिन लॉकडाउन में मजदूरों के पलायन से काम ठप हो गया।
हाईड्रो कॉलेज की कक्षाएं कांगड़ा के नगरोटा बगवां में चल रही हैं। अभी इलेक्ट्रिकल और सिविल विषयों में 60-60 का बैच बिठाया गया है, जबकि अगले शैक्षणिक सत्र से मेकेनिकल और कंप्यूटर साइंस विषय भी शुरू किए जाएंगे। कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. आरके अवस्थी ने बताया कि तीन जून को भवन निर्माण कमेटी की बैठक बिलासपुर में हुई है। इसमें कई अहम विषयों पर चर्चा की गई है। अगले साल कांगड़ा से बिलासपुर में कक्षाएं शिफ्ट की जाएंगी। लॉकडाउन में मजदूरों के पलायन की वजह से निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न हुई है, लेकिन मजदूरों की उपलब्धता पर कार्य में गति आएगी। बंदला में निर्माणाधीन राजकीय हाईड्रो इंजीनियरिंग में आधुनिक लैब की स्थापना और फर्नीचर सहित अन्य कार्यों के लिए राज्य सरकार ने एशियन डेवलेपमेंट बैंक (एडीबी) के माध्यम से 10 करोड़ रुपये की ग्रांट जारी की है।