रिवालसर झील के प्रदूषित पानी की सैंपल रिपोर्ट आ गई है। इसमें ऑक्सीजन की अत्यधिक कमी पाई गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रिपोर्ट एसडीएम बल्ह को रिपोर्ट सौंप दी है। अभी झील के पानी के रंग बदलने के कारणों की फाइनल रिपोर्ट नहीं आई है। झील में वीरवार को भी मछलियों के मरने का सिलसिला जारी रहा।
विभाग के अधिकारी मछलियों को बचाने में लगे हैं। इन्हें बीएसएल नहर में शिफ्ट किया जा रहा है। झील में ताजा पानी तथा ऑक्सीजन की पंपिंग कर मछलियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। मामले में जहर घोलने की शिकायत मिलने पर सीआईडी की टीम भी रिवालसर पहुंच गई है।
इन दिनों मछलियों की ब्रीडिंग का समय चला हुआ है। झील में कई वर्षों से मछलियों की तादात बढ़ गई है। लंबे अरसे से इन्हें झील से शिफ्ट नहीं किया गया है। इससे ये क्षमता से अधिक हो गई हैं। टनों के हिसाब से मछलियों की मौत के बाद प्रशासन ने झील के संरक्षण को सोसायटी का गठन तो कर दिया, लेकिन इन्हें बचाने के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।
बीते बुधवार तक मृत मछलियों को 12 से 15 ट्रैक्टर डंप किए जा चुके थे। एसडीएम बल्ह सिद्धार्थ आचार्य ने कहा कि बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार झील में आक्सीजन की बेहद कमी हो गई थी। इस कारण मछलियों की मौत हुई है। पानी के रंग बदलने के कारणों का पता नहीं चला है। हजारों मछलियों को झील से शिफ्ट किया गया है।
कई वर्षों से नहीं हटी गाद, न शिफ्ट हुईं मछलियां
झील में कई वर्षों से जमी गाद और झील की गहराई में लगातार हो रही कमी को मछलियों की मौत का कारण माना जा रहा है। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि कई वर्षों से झील के नीचे जो गंदगी जमी थी, उसमें मछलियों की हलचल से झील का रंग बदला है। कई वर्षों से झील से मछलियों को शिफ्ट नहीं किया है। इससे झील में क्षमता से कई गुना अधिक मछलियां हो गईं थीं, लेकिन इन्हें यहां से शिफ्ट नहीं किया गया था।