निजी बस ऑपरेटरों की दो दिन की हड़ताल से परिवहन निगम ने शहरों में अतिरिक्त बसें दौड़ा दो करोड़ की अतिरिक्त कमाई की, लेकिन अब निगम प्रबंधन के पास कर्मचारियों के लिए न तो वित्तीय लाभ जारी करने और न ही ग्रेच्युटी और लीव इन कैशमेंट का पैसा जारी किया जा रहा है। 25 फीसदी आईआर के लिए भी कर्मचारियों को तरसना पड़ रहा है।
परिवहन निगम में हजारों कर्मचारी हैं, जिन्हें इस वित्तीय लाभों से वंचित रखा गया है। परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर ने कर्मचारियों को आश्वस्त किया है था कि समय रहते कर्मचारियों की यह लंबित मांग पूरी हो जाएगी, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। पेंशनरों को भी वित्तीय लाभों को लेकर निगम प्रबंधन के चक्कर काट रहे हैं।
पथ परिवहन निगम की सर्व कर्मचारी यूनियन के महासचिव खेमेंद्र गुप्ता ने बताया कि एचआरटीसी कर्मचारियों के लंबे समय से वित्तीय लाभों से वंचित रखा गया है। अनुबंध पर तैनात चालक परिचालकों को भी विभाग की अपेक्षा कम राशि दी जा रही है। इसके अलावा पेंशनर को न तो लीव इन कैशमेंट का पैसा दिया गया न ही ग्रेच्युटी जारी की गई है। सभी मांगों का प्रस्ताव प्रस्ताव तैयार कर सरकार को सौंपा जाना है।
पेंशनरों ने विभाग की तर्ज पर मांगे वित्तीय लाभ
पथ परिवहन पेंशनर कल्याण संगठन ने भी प्रदेश सरकार से विभागों की तर्ज पर वित्तीय लाभ जारी करने की मांग की है। संगठन के महासचिव सुरेंद्र गौतम ने कहा कि पेंशनरों के मामले सालों से लंबित है। उन्होंने निगम प्रबंधन से इन मामलों को निपटाने के लिए प्रकोष्ठ का गठन करने की मांग की है। उन्होंने प्रबंधन को चेतावनी दी है कि अगर पेंशनरों की मांगे नहीं मानी गई तो पेंशनर निगम प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।