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HRTC को भारी पड़ गया प्रशिक्षु कंडक्टरों की सेवाएं लेना, हाईकोर्ट जाने की तैयारी

Fri, 27 Apr 2018 12:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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प्रशिक्षु कंडक्टर का प्रशिक्षण खत्म होने के बाद उनकी सेवाएं दो साल तक लेना निगम प्रबंधन के लिए भारी पड़ गया। इसी को आधार बनाकर प्रशिक्षु कंडक्टर हाईकोर्ट जाने की तैयार कर रहे हैं। परिवहन कार्यालय भी इसको लेकर असमंजस में पड़ गया है। कौशल विकास निगम के तहत युवाओं को 3 महीने तक प्रशिक्षण दिया जाना था।

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इसमें एक महीने दफ्तर का काम सिखाने, जबकि अन्य दो महीने इनकी सेवाएं बसों में ली जाती हैं। प्रति घंटा के हिसाब से राशि का भुगतान किया जा रहा है। इसके बाद प्रशिक्षित के बाद इन युवाओं को कंडक्टर का प्रमाण पत्र मिलना था।

 

लेकिन निगम प्रबंधन ने प्रशिक्षण खत्म होने के बाद इनकी सेवाएं जारी रखीं। इधर, प्रशिक्षु कंडक्टर के हड़ताल पर जाने से निगम के करीब 200 रूट प्रभावित हुए हैं। प्रतिदिन निगम को लाखों का घाटा हो रहा है। क्षेत्र के लिए बसें न चलने से जनता परेशान है।

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बीओडी बैठक करने का फैसला

जिस क्षेत्र के लिए दिन में 6 बसें चलती थीं, वहां सिर्फ दो बसें चलाई जा रही हैं। बसों में ओवरलोडिंग जारी है। रूट प्रभावित होने से परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर ने निगम के एमडी से फोन पर बात की और उन्हें व्यवस्था सुधारने को कहा है।

सरकार ने 1300 कंडक्टर भर्ती मामले की फाइल भी सरकार ने मांगी है। बताया जा रहा है कि सरकार जल्द परिणाम घोषित करने जा रही है। मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षु कंडक्टरों से हड़ताल खत्म करने को कहा है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। सरकार बीच का रास्ता निकाल रही है।

प्रशिक्षु कंडक्टरों को लेकर सरकार ने बीओडी की बैठक करने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि इनकी सेवाएं लगातार जारी रखी जा रही हैं। परिवहन व्यवस्था को सही तरीके से चलाने के लिए सरकार को दो हजार से अधिक कंडक्टरों की जरूरत है।
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