शिमला में दो साल के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर जाखू के लिए एचआरटीसी टैक्सी सेवा शुरू होने जा रही है। लोगों की डिमांड पर एचआरटीसी प्रबंधन आज से हर आधे घंटे बाद रिट्ज से जाखू के लिए एचआरटीसी टैक्सी चलाएगा। परिवहन मंत्री जीएस बाली ने सोमवार को अपने फेसबुक पेज पर टैक्सी सेवा शुरू करने का एलान किया।
परिवहन मंत्री ने टैक्सियों में दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए आगे की दो सीटें रिजर्व रखने के कड़े निर्देश दिए हैं। टैक्सियों में वरिष्ठ नागरिकों से सामान्य यात्रियों के मुकाबले किराया कम वसूला जाएगा। विशेष श्रेणी यात्रियों के टैक्सी में सवार होने के बाद सीटें खाली होने पर ही अन्य यात्री टैक्सियों में सफर कर सकेंगे।
टैक्सी चलाने के साथ साथ टिकट काटने की जिम्मेवारी भी निगम के चालकों की ही होगी। जाखू रूट पर एचआरटीसी इस बार 9 के स्थान पर 12 सीटर टैक्सी चलाएगा। अभी तक सिर्फ रविवार के दिन जाखू के लिए एचआरटीसी की दो टैक्सियां चलती हैं।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए आरक्षित रहेंगी सीटें
स्थानीय लोगों और सैलानियों की सुविधा के लिए रिट्स-जाखू रूट पर सुबह आठ से रात आठ बजे के बीच टैक्सियां चलाई जाएंगी। टैक्सियों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सीटें आरक्षित रहेंगी। - देवासेन नेगी, क्षेत्रीय प्रबंधक, एचआरटीसी
यह होगा टैक्सियों का किराया
दूरी वरिष्ठ नागरिक सामान्य
2 किलोमीटर तक 15 20
2 से 4 किलोमीटर 20 30
वरिष्ठ नागरिकों के लिए रिजर्व रहेंगी सीटें
एचआरटीसी टैक्सियों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सीटें रिजर्व रहेंगी। टैक्सी की अन्य सीटों पर भी रोगियाें, अपंगों और विशेष श्रेणी यात्रियों को प्राथमिकता दी जाएगी। जिस स्थान से टैक्सी का रूट शुरू होगा यदि वहां अधिक संख्या में वरिष्ठ नागरिक हैं तो टैक्सी में सिर्फ वरिष्ठ नागरिक ही सफर करेंगे, अन्यों को टैक्सी में नहीं बैठाया जाएगा।
सुबह 8 से रात 8 बजे तक चलेंगी टैक्सियां
रिट्स-जाखू रूट पर एचआरटीसी टैक्सियां सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक चलेंगी। सर्दियों में सुबह आठ से रात सात बजे तक टैक्सियों का संचालन किया जाएगा।
टैक्सी में ईटीएम से मिलेंगे टिकट
एचआरटीसी टैक्सियों में यात्रियों से मनमाने किराये की वसूली नहीं हो सकेगी। टैक्सियों में यात्रियों को ईटीएम (इलेक्ट्रानिक टिकटिंग मशीन) से टिकट दिए जाएंगे।
जीपीएस से लैस होंगी टैक्सियां
रूट पर चलने वाली एचआरटीसी टैक्सियां जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) से लैस होंगी। जीपीएस की मदद से निगम के अधिकारी टैक्सियों पर नजर रख सकेंगे।