प्रदेश हाईकोर्ट ने राजधानी में टैक्सियां चलाए जाने पर कोई रोक नहीं लगाई है। अदालत ने एचआरटीसी को प्रतिवादी बनाते हुए टैक्सियां बंद किए जाने के मामले पर जवाब तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर एहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ शिमला शहर में चल रहे अव्यवस्थित ट्रैफिक के मुद्दे पर सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि एचआरटीसी आम लोगों को यह कह कर गुमराह कर रही है कि हाईकोर्ट ने टैक्सियां चलाए जाने पर रोक लगा दी है।
वास्तव में हाईकोर्ट ने यह कहा था कि इन टैक्सियों में सफर करने का लाभ उन लोगों को मिलना चाहिए जोकि वृद्ध या फिर अपंग हैं। कोर्ट ने इन टैक्सियों का संचालन सही तरीके से करने के आदेश दिए थे।
एचआरटीसी को इस मुद्दे पर अपना स्टैंड अदालत के समक्ष तीन नवंबर तक रखना होगा। इस दिन इस मामले पर सुनवाई होगी। अब तीन नवंबर की तारीख पर सबकी नजरें टिकी हैं।