इसमें 20 रुपये निजी ऑपरेटरों को जबकि 20 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से डीजल डाला जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि कुल 80 बसों में से 29 बसें बिना डिमांड के चलाई गई। परिवहन निगम को इन बसों से प्रतिदिन हजारों रुपये का घाटा हो रहा है।
परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर ने बताया कि वेटलीजिंग बसों की जांच चल रही है। घाटे पर चल रही सभी वेटलीजिंग की बसें बाहर होंगी। निगम की अपनी बसें खड़ी हैं। इससे भी निगम को हर महीने लाखों का घाटा हो रहा है।
हिमाचल के जिन रात वाले रूटों पर परिवहन निगम की बसें चलाई जाती थी उन रूटों पर भी वेटलीजिंग की बसें चला दी गईं। संयुक्त समन्वय समिति के सचिव राजेंद्र ठाकुर ने बताया कि रात्रि रूटों से परिवहन निगम को फायदा हो रहा था।
अपनी बसें हटाई जाने से निगम को घाटा हुआ है। उन्होंने कहा कि उस दौरान निगम प्रबंधन के समक्ष भी इस मामले को उठाया गया था, लेकिन समिति की नहीं सुनी गई।