प्रदेश में 21 जुलाई से परिवहन व्यवस्था चरमरा सकती है। हिमाचल परिवहन कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति ने 21 जुलाई से वर्क टू रूल पर जाने का फैसला लिया है। समन्वय समिति के तहत आने वाली आठ यूनियनें सिर्फ आठ घंटे ही ड्यूटी देंगी। समिति अध्यक्ष हरदयाल सिंह, उपाध्यक्ष रूप चंद, सचिव खेमेंद्र गुप्ता, प्रवक्ता राजेंद्र सिंघा, कोषाध्यक्ष सुरेश ठाकुर, सदस्य राजेंद्र ठाकुर, देवराज ठाकुर, विद्यासागर, रोशन चौहान, गोपाल लाल, नानक शांडिल, युद्धराज, सुखराम और चंद्रमणि सोनी ने कहा कि सरकार और निगम प्रबंधन कर्मचारियों की मांगें पूरा करने में असफल रहे हैं।
निगम में कर्मचारियों की समुचित भर्ती नहीं की जा रही। परिचालकों की भर्ती प्रक्रिया लबे समय से अपेक्षित है, लेकिन सरकार और निगम प्रबंधन भर्ती प्रक्रिया पूर्ण करने में असफल रहे हैं। परिचालकों की कमी से कर्मचारियों पर कार्य का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उन्हें समय पर अवकाश भी नहीं मिल रहा है। कार्यरत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वित्तीय लाभ समय पर नहीं मिल रहे हैं।
ये हैं समन्वय समिति की मांगें
समिति ने कहा कि 20 जुलाई तक मांगें पूरा नहीं की तो कर्मचारी 21 जुलाई से वर्क तू रूल के तहत कार्य करेंगे। हिमाचल परिवहन कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के तहत चालक-परिचालक संगठन, एटक, तकनीकी कर्मचारी संगठन, परिवहन कर्मचारी महासंघ, सर्व कर्मचारी यूनियन, मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन, स्टोर स्टाफ एसोसिएशन और परिचालक कर्मचारी संगठन वर्क टू रूल पर जाएंगे। आठ घंटे से अधिक कोई काम नहीं करेगा।
निगम में रिक्त सभी वर्गों के पदों पर सरकार की नीति के अनुसार भर्ती करना।
पेंशन से संबंधित मामला सरकार के समक्ष रखना।
20 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण कर चुके परिचालकों को दो विशेष वेतन वृद्धियां देना।
चार हजार, छह हजार रुपये पर कार्य कर रहे चालकों-परिचालकों को सरकार की अधिसूचना के अनुसार वेतन देना। पीस मील कर्मचारियों को एकमुश्त अनुबंध पर लाना।
ग्रेड पे से वंचित कर्मचारियों और अधिकारियों को ग्रेड पे देना।
कर्मचारियों के रुके पड़े ओवरटाइम की अदायगी एकमुश्त करना।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों के रुके वित्तीय लाभ जारी करना।