विवादित कंडक्टर भर्ती मामले में दस्तावेजों से छेड़छाड़ करने वाले अफसरों का नपना अब तय है। शुक्रवार को पूर्व आईएएस अफसर समेत तत्कालीन चार डीएम के हस्ताक्षर नमूने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने जांच के लिए फोरेंसिक लैब जुन्गा भेज दिए हैं। छानबीन के दौरान भर्ती संबंधी दस्तावेजों में गड़बड़ियां पाई गईं।
इसमें किस-किस अफसर ने कटिंग और टैंपरिंग की है, इसका मिलान फोरेंसिक जांच में हो जाएगा। फोरेंसिक जांच से रिपोर्ट आने के बाद संबंधित अफसरों के खिलाफ एसआईटी को पुख्ता सबूत मिलने की पूरी उम्मीद है और इसे मजबूत आधार बनाकर एसआईटी आरोपियों के खिलाफ तैयार की जाने वाली चार्जशीट में शामिल करेगी।
यह है मामला
24 अक्तूबर, 2003 को निदेशक मंडल की बैठक में कंडक्टरों के 300 पद भरने की मंजूरी दी गई। इसमें सामान्य वर्ग के 166 ओबीसी के 54, एससी के 66 और एसटी के 14 पद भरे जाने थे। इन पदों के लिए प्रदेश भर से 17,890 आवेदन आए। 20 सितंबर 2004 को इन पदों पर 300 की जगह 365 पद भर दिए गए। 12 मई 2005 को 13 और पद भर दिए गए। इससे भर्ती विवादों में आ गई। लंबे समय के बाद 14 मार्च 2017 को पुलिस ने तत्कालीन एमडी और डीएम समेत पांच लोगों को आरोपी बनाकर थाना सदर शिमला में एफआईआर दर्ज की है।
क्या कहती है एसआईटी
एसआईटी प्रमुख डीएसपी सिटी दिनेश शर्मा ने कहा कि तत्कालीन पांच अफसरों के हस्ताक्षर नमूने शुक्रवार को फोरेंसिक जांच जुन्गा भेजे गए हैं। जांच के दौरान भर्ती संबंधी दस्तावेजों में कटिंग और दूसरी गड़बड़ियां पाई गई हैं। यह किन अफसरों ने की इस बात का खुलासा रिपोर्ट मिलने का बाद हो जाएगा। हर पहलू पर तफ्तीश की जा रही है।