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एचआरटीसी बसों में यात्रियों से ऐसे हो रही अवैध वसूली

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एचआरटीसी ने न्यूनतम किराया तीन रुपये निर्धारित किया है लेकिन एचआरटीसी ही पांच रुपये न्यूनतम किराया वसूल कर रही है। अधिकतर लांग रूट की बसों में ऐसे केस सामने आ रहे हैं। इससे यात्रियों की जेब ढीली हो रही है।
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यह सब टिकटिंग मशीन से हो रहा है। कई मशीनों में स्टेशन ही दर्ज नहीं किए गए हैं। ऐसे से फिर मुसाफिरों को ज्यादा किराये का भुगतान करना पड़ रहा है।

एचआरटीसी प्रबंधन ने कंडक्टरों को इलेक्ट्रानिक टिकटिंग मशीनें तो थमा दी हैं लेकिन उनमें किराया ठीक से फीड नहीं किया है। किराये को लेकर यात्रियों और कंडक्टरों के बीच विवाद भी हो रहा है। एचआरटीसी के अलग-अलग डिपो की बसों में यात्रियों से अलग-अलग किराया वसूल किया जा रहा है।

टिकटिंग मशीनों में दर्ज किराये के कारण कुछ बसों में न्यूनतम किराया भी पांच रुपये वसूला जा रहा है। कुछ टिकटिंग मशीनों में पूरे स्टापेज ही नहीं दर्शाए गए हैं। इस कारण भी यात्रियों को चूना लग रहा है।
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ज्यादा वसूल कर रहे किराया

शिमला के लोकल स्टॉपेजों पर यात्रियों से लांग रूट बसों में अधिक किराया वसूला जा रहा है। कंडक्टर अधिक वसूली के पीछे टिकटिंग मशीनों में अधिक किराया फीड होने का तर्क दे रहे हैं। रामपुर और रोहड़ू डिपो की बसों में छोटा शिमला, नवबहार और टालैंड से बस स्टैंड का किराया निर्धारित किराये से अधिक वसूला जा रहा है।

एचआरटीसी की कुछ बसों में न्यूनतम किराया तीन की जगह पांच रुपये वसूला जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग-22 पर नंगलदेवी से ठियोग का किराया पांच रुपये वसूला जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तीन किलोमीटर तक न्यूनतम किराया तीन रुपये बनता है, जबकि कंडक्टर मनमर्जी से 4 और 5 रुपये किराया ले रहे हैं।

एचआरटीसी की कुछ टिकटिंग मशीनों में पूरे स्टापेज ही नहीं हैं जिसके कारण यात्रियों को कम सफर करने पर भी अधिक किराया चुकाना पड़ रहा है। सोलन डिपो की थानाधार-चंडीगढ़ बस में छराबड़ा, सरोग गली, रहीघाट और लंबीधार स्टेशन न होने के कारण यात्रियों से दो से तीन किलोमीटर का अतिरिक्त किराया वसूला जा रहा है।
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