प्रदेश विश्वविद्यालय का एक और कारनामा सामने आया है। एमफिल और पीएचडी की फीस बढ़ोतरी पर दो-दो अधिसूचनाएं जारी कर दी गई हैं। परीक्षा नियंत्रक की ओर से 22 अगस्त को अधिसूचना जारी कर परीक्षा फीस तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
इसी तरह 16 अगस्त को अधिष्ठाता अध्ययन कार्यालय से जारी अधिसूचना में भी सभी विभागों को नई दरें लागू करने के आदेश हुए हैं। दोनों अधिसूचनाओं में बढ़ाई गई फीस दरों में भारी अंतर है।
अब असमंजस यह है कि पीएचडी और एमफिल की प्रवेश प्रक्रिया के दौरान विभाग कौन सी दरें वसूलेगा। वहीं, विवि प्रशासन ने छात्रों से फीस वसूलनी भी शुरू कर दी है।
सीईओ की अधिसूचना के मुताबिक दरें
मद दर एमफिल/ एलएलएम/एमटेक डेजेरटेशन/इवेल्यूएशन 5000, इवेल्यूएशन ऑफ पीएचडी थिसीज 5000, पीएचडी रजिस्ट्रेशन (एचपी / एचपी से बाहर)3000/5000, पीएचडी ट्यूशन फी प्रति माह जनरल/साइंस 500 जनरल/ 750 साइंस, डेजेटेशन पीएचडी इवेल्यूएशन सात साल तक 15000, सात साल के बाद 25000 है।
डीएस कार्यालय की अधिसूचना के मुताबिक दरें
रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्ट्स साइंस 800/1000 प्रति माह, एमफिल और पीएचडी रजिस्ट्रेशन 5000, एमफिल डेजेरटेशन 2000/ 2500, पीएचडी डेजेरटेशन 5 साल तक 10,000, पांच साल के बाद, 5000 प्रति वर्ष सातवें साल तक। इससे अधिक 8वें और नवें साल को 25000 प्रति वर्ष फीस देनी होगी।
सीओई की अधिसूचना
सीओई की अधिसूचना में पीएचडी की रजिस्ट्रेशन फीस तीन और पांच हजार की गई है। इसे डीएस की अधिसूचना में पांच हजार किया है। एमफिल की डेजेरटेशन फीस सीओई ने पांच हजार की है।
डीएस ने 2000 और लेट फीस के साथ 2500। सबसे अधिक अंतर पीएचडी डेजेरटेशन की फीसों में है। सीओई की अधिसूचना में इसे सात साल तक 15000, उसके बाद 25000 किया है। डीएस की अधिसूचना में इसे पांच साल तक 10,000, सातवें साल तक 15000 प्रति वर्ष, आठवें और नवें साल में इसे 25000 प्रति वर्ष तय किया गया है।
ईसी में ले जाया जाएगा मामला
परीक्षा नियंत्रक प्रो. श्यामलाल कौशल और अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. टीसी भल्ला ने माना कि एक या दो मदों में दोनों अधिसूचनाओं की फीस में अंतर है। इसे ईस मामले को ईसी में ले जाकर दुरूस्त करवाया जाएगा। फिलहाल, विभागों से संबंधित फीसें डीएस की लागू होंगी। परीक्षा से संबंधित फीसें सीओई की अधिसूचना के मुताबिक लागू होंगी।
बढ़ाई फीसें वापस लेने की मांग
शोध छात्रों का आरोप है कि एक ही मद की दो-दो दरों से साफ है कि विवि ने अपनी मर्जी से फीसें बढ़ाई हैं। इसे तुरंत वापस लिया जाए। विवि प्रशासन में ही तालमेल की कमी नजर आ रही है। फीस को लेकर गठित कमेटी की रिपोर्ट भी आना बाकी है। इसलिए बढ़ी दरों से फीस न ली जाए।