हिमाचल विवि के भूगोल विभाग को 40 लाख की दो परियोजनाएं मंजूर, किन्नौर से पर्वतीय विकास तक का होगा आकलन
आर्थिक पहलुओं के विश्लेषण पर भी होगा अध्ययन
संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। हिमाचल के पहाड़ों में मानव-वन्यजीव संघर्ष और तेजी से बढ़ती पर्यटन गतिविधियों के बीच विकास का संतुलन तलाशने के लिए हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का भूगोल विभाग दो बड़े शोध प्रोजेक्टों पर काम कर रहा है।
भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद से दोनों परियोजनाओं के लिए 40 लाख रुपये की सहायता मिली है। शोध में किन्नौर में मानव-भालू संघर्ष के सामाजिक-आर्थिक असर से लेकर आपदा की आशंका वाले पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा तक का अध्ययन किया जाएगा। पहली परियोजना किन्नौर में मानव-भालू संघर्ष के सामाजिक-आर्थिक आयाम और विश्लेषण पर है। परियोजना के निदेशक डॉ. बीआर ठाकुर हैं। इसमें संघर्ष को केवल वन्यजीव से जुड़ी समस्या के तौर पर नहीं देखा जाएगा बल्कि स्थानीय समाज और अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव को शोध के केंद्र में रखा है। किन्नौर की परिस्थितियों में मानव और भालू के बीच टकराव से जुड़े सामाजिक-आर्थिक पहलुओं का विश्लेषण इस अध्ययन का प्रमुख हिस्सा होगा।
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दूसरी परियोजना का फोकस आपदा की दृष्टि से संवेदनशील पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र में टिकाऊ पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास के रास्तों पर है। इस अध्ययन में शासन व्यवस्था को केंद्र में रखा है। शोध में पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को केवल निर्माण और आर्थिक गतिविधि के नजरिये से नहीं बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और स्थानीय परिस्थितियों के साथ जोड़कर देखा जाएगा। परियोजना में डॉ. बीआर ठाकुर सह-परियोजना निदेशक हैं।
दोनों परियोजनाओं के विषय हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य के सामने मौजूद अलग-अलग विकास संबंधी सवालों से जुड़े हैं। एक ओर मानव और वन्यजीव के बीच बदलते संबंधों को समझने की जरूरत है तो दूसरी ओर पर्यटन और आधारभूत ढांचे के विस्तार को पर्वतीय पर्यावरण की संवेदनशीलता के अनुरूप देखने की चुनौती है। दूसरी परियोजना विकसित भारत 2047 की व्यापक परिकल्पना से जुड़ी है। विश्वविद्यालय के शोध उत्कृष्टता कार्यक्रम में दोनों परियोजनाओं को वर्ष 2026 की प्रमुख शोध परियोजनाओं में शामिल किया है।
शोध में सामाजिक पहलू अहम
शोध की इन परियोजनाओं में पर्वतीय समस्याओं को केवल भौगोलिक या पर्यावरणीय दृष्टिकोण से नहीं देखा गया है। किन्नौर वाले अध्ययन में सामाजिक-आर्थिक आयाम को प्रमुखता दी है। वहीं पर्यटन और बुनियादी ढांचे से जुड़े अध्ययन में शासन व्यवस्था को केंद्र में रखा है। इससे दोनों शोधों का दायरा स्थानीय परिस्थितियों और विकास प्रक्रिया तक पहुंचता है। विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग की ओर से वर्ष 2026 में चल रही इन परियोजनाओं को शोध उत्कृष्टता के तहत प्रमुख कार्यों में रखा है।