सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद विश्वविद्यालय ने निजी कॉलेजों को दिए निर्देश
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कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने जारी किए आदेश संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। छात्र सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) से जुड़े निजी कॉलेजों की व्यवस्थाओं की पड़ताल शुरू हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने एचपीयू से संस्थानों की जानकारी मांगी है। इसके बाद विश्वविद्यालय की अकादमिक शाखा ने सभी गैर-सरकारी और संबद्ध कॉलेजों से रिपोर्ट तलब की है। कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। अब एचपीयू को अपने साथ संबद्ध निजी कॉलेजों की छात्र सुरक्षा व्यवस्था का पूरा रिकॉर्ड तैयार करना होगा। इसमें छात्र आत्महत्या और अप्राकृतिक मृत्यु से जुड़े मामलों की जानकारी प्रमुख है। कॉलेजों को बताना होगा कि उनके यहां ऐसा कोई मामला सामने आया है या नहीं।
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मामला आने पर पुलिस को दी गई सूचना और प्राथमिकी या दैनिक डायरी से जुड़ी जानकारी भी देनी होगी। कॉलेजों में चौबीस घंटे चिकित्सा सहायता की स्थिति भी रिपोर्ट में शामिल होगी। परिसर में चिकित्सा सुविधा, नजदीकी अस्पताल या औषधालय की उपलब्धता बतानी होगी। एंबुलेंस और आपातकालीन सहायता की व्यवस्था का विवरण भी देना होगा। शिक्षकों के पदों को लेकर भी एचपीयू को कॉलेजवार जानकारी जुटानी है। स्वीकृत, भरे और रिक्त पदों की संख्या देनी होगी। आरक्षित वर्ग के रिक्त पदों पर भर्ती अभियान की स्थिति भी बतानी होगी। इस रिपोर्ट से एचपीयू के निजी संबद्ध कॉलेजों में छात्र सुरक्षा, चिकित्सा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
छात्रवृत्ति अटकी तो कॉलेजों को देना होगा हिसाब एचपीयू से जुड़े निजी कॉलेजों को छात्रवृत्ति वितरण की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। संस्थानों से लंबित छात्रवृत्ति मामलों की संख्या मांगी है। कितने मामलों का निपटारा हो चुका है, इसकी जानकारी भी देनी होगी। लंबित मामलों के साथ देरी का कारण बताना होगा। छात्रवृत्ति में देरी पर कॉलेज ने कोई नोटिस जारी किया है या नहीं, यह भी रिपोर्ट में दर्ज करना होगा। इससे विश्वविद्यालय के स्तर पर छात्रवृत्ति से जुड़ी लंबित समस्याओं की पहचान हो सकेगी और संबंधित संस्थानों की जवाबदेही तय की जा सकेगी।
रैगिंग रोकने की व्यवस्था की देनी होगी जानकारी निजी संबद्ध कॉलेजों में छात्र कल्याण से जुड़ी व्यवस्थाओं की भी जांच होगी। एचपीयू को कॉलेजों से यूजीसी और अन्य नियामक संस्थाओं के नियमों के पालन की पुष्टि लेनी है। रैगिंग रोकने की व्यवस्था और शिकायत निवारण तंत्र की स्थिति बतानी होगी। कॉलेजों में परामर्श केंद्र उपलब्ध है या नहीं, इसकी जानकारी भी देनी होगी। राष्ट्रीय कार्यबल से मांगी कोई सूचना लंबित है तो उसका विवरण देना होगा।