एचपीयू के इतिहास में पहली मर्तबा किसी परीक्षा के परिणाम में 90 फीसदी से ज्यादा छात्र फेल हुए हैं। यह एक ओर जहां विश्वविद्यालय की साख पर बट्टा है, वहीं इससे प्रदेश भर के करीब रूसा सीबीसीएस के तीसरे बैच के पहले सेमेस्टर की परीक्षाओं में बैठे करीब 40 हजार छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला है।
विश्वविद्यालय प्रशासन जहां खराब नतीजों के लिए छात्रों को ही जिम्मेदार ठहरा रहा है। चूंकि वे हर विषय की थ्योरी परीक्षा और इंटरनल असेसमेंट (आईए) के लिए न्यूनतम प्राप्तांक ही नहीं ले पाए हैं। स्थिति को छात्रों के सामने रखने के लिए विवि जल्द रूसा की साइट और कॉलेजों को भी हर छात्र के विषयवार प्राप्त अंकों का पूरा ब्योरा उपलब्ध करवाएगा।
इसमें छात्र स्वयं जान लेंगे कि उसने कितने अंक पाए हैं। विवि के कंप्यूटर साइंस विभाग कॉलेजवार छात्रों के प्राप्तांक का ब्योरा खंगाल रहा है। विवि के परीक्षा नियंत्रक डा. जेएस नेगी ने माना कि ऐसी व्यवस्था करने पर कार्य चल रहा है।
बदली मूल्यांकन प्रणाली को लेकर जागरूक नहीं किए छात्र
एचपीयू ने पिछले साल रूसा सीबीसीएस यूजी परीक्षाओं के लिए बनाए आर्डिनेंस में बदलाव किया। उसमें प्रति विषय जो अंक विभाजन 50:50 हुआ करता था, उसे इस तीसरे बैच के पहले सेमेस्टर के लिए 70:30 कर दिया गया। इसमें क्रमश: सेमेस्टर की थ्योरी के अंक 50 से बढ़ाकर 70 तो इंटरनल असेसमेंट के अंक 50 से घटाकर 30 कर दिए गए थे।
उसके मुताबिक ही इस बैच की अक्तूबर नवंबर में हुई परीक्षा में प्रश्न पत्र सेट हुए और मूल्यांकन भी हुआ। छात्रों को सिर्फ ये बताया गया कि अंक विभाजन अनुपात बदला गया है। छात्रों को जागरूक नहीं किया गया कि इन दोनों में भी छात्र को न्यूनतम अंक प्राप्त करने होंगे। थ्योरी और इंटरनल असेसमेंट के लिए तय अंक के 45 फीसदी अंक लेना अनिवार्य कर दिया गया। इसकी छात्रों को जानकारी नहीं दी गई।
हालांकि विवि ने अगस्त माह में ही कॉलेजों को आर्डिनेंस में बदलाव को लेकर सूचित जरूर किया था। यूजी के प्रथम सेमेस्टर के हजारों छात्रों के साइट से डाउनलोड किए ग्रेड कार्ड में अब तक सिर्फ विषय के प्राप्तांक और आईए के आगे स्टार नजर आ रहे हैं, जिससे वे परीक्षा पास नहीं कर पाए हैं। हालांकि सेमेस्टर सिस्टम होने पर छात्रों को फेल नहीं कहा जा सकता, उनका उस विषय में एमए कक्षाओं की तरह से रि-अपीयर होगा। इस वे रुटीन में अगली परीक्षा के साथ कभी भी पास कर सकते हैं।
रिलेटिव की जगह एबसोल्यूट की है ग्रेडिंग
थ्योरी और इंटरनल असेसमेंट का अंक अनुपात बदले जाने के साथ ही इस 2015 के बैच की थ्योरी और आईए के लिए रिलेटिव की जगह एबसोल्यूट मैथड अपना लिया है, जिससे छात्र के प्राप्तांक आधार पर ही ग्रेड दिया जाता है। पहले पूरे संकाय व विषय की ऐवरेज से ग्रेड तय होता था, जो अब छात्र के अपने प्राप्तांक से तय हो रहा है।