प्रदेश विश्वविद्यालय ने पीजी/एमफिल कोर्स की तरह पीएचडी में प्रवेश को शेड्यूल जारी किया है। एचपीयू में अब पीएचडी में प्रवेश विभागों की मर्जी या सीट खाली होने पर न होकर अधिष्ठाता अध्ययन (डीएस) ऑफिस से जारी शेड्यूल के मुताबिक होगा।
साल में दो बार दिसंबर और जून में ही पीएचडी में प्रवेश मिलेगा। विवि के अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. टीसी भल्ला ने कहा कि विभागों के अधिष्ठाताओं की बैठक में यह फैसला लिया गया। इसके बाद ही पीएचडी प्रवेश का शेड्यूल तय कर प्रक्रिया पूरी करने का फैसला लागू कर दिया गया है। नई प्रक्रिया के मुताबिक 21 नवंबर तक विभागों में आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख है।
29 नवंबर तक विभाग इसके बावजूद रिक्त रहने वाले पदों की रिपोर्ट डीएस ऑफिस को भेजेंगे। इसके बाद सीधे प्रवेश को तय यूजीसी की शर्त पर खरा न उतरने वाले छात्रों के अलावा अन्य छात्रों के लिए दिसंबर अंत तक प्रवेश परीक्षा होगी।
नई व्यवस्था से यह लाभ
- पीएचडी में साल में दो बार शेड्यूल के मुताबिक प्रवेश प्रक्रिया पूरी होगी।
- प्रवेश प्रक्रिया में इससे पारदर्शिता आएगी।
- पीएचडी करने वाले छात्रों को सूचना मिलेगी, जिससे वे आवेदन कर पाएंगे।
- अब तक विभाग जो अपने स्तर पर साल भर पीएचडी में प्रवेश देते थे, वह नहीं होगा।
- प्रवेश प्रक्रिया पर एचपीयू प्रशासन की नजर रहेगी।
प्रवेश के लिए शैक्षणिक योग्यता
यूजीसी के तय मानकों के तहत पीएचडी में प्रवेश को पात्रता शर्तें रखी हैं। आवेदनकर्ता के मास्टर डिग्री में सामान्य वर्ग के लिए 55 और एससी/एसटी को 50 फीसदी अंक या विवि के आर्डिनेंस के मुताबिक विदेशी विवि से इसके समकक्ष डिग्री।
2. नेट/नेट-जेआरएफ/इंस्पायर/राजीव गांधी नेशनल फेलोशिप/डीबीटी/एसएलईटी और एचपीयू के 16.12 की आठ नवंबर को जारी अधिसूचना के मुताबिक एमफिल, एलएलएम में प्रवेश परीक्षा पास कर प्रवेश पा चुके छात्र भी पात्र होंगे।
सौ रुपये शुल्क के साथ आवेदन
बायोसाइंस, एजूकेशन, लॉ, फिजिक्स, जियोग्राफी, संस्कृत, इतिहास, कंप्यूटर साइंस और बायो टेक्नोलॉजी विभाग की खाली पीएचडी सीटों के लिए आवेदनकर्ताओं को सौ रुपये आवेदन फीस देनी होगी। जिन्हें प्रवेश मिलेगा, उन्हें 16 अगस्त को जारी अधिसूचना के मुताबिक नई पंजीकरण की 5000 की फीस जमा करवानी होगी।