प्रदेश विश्वविद्यालय ने कांफिडेंशियल परीक्षा परिणाम लेने की फीस भी दस गुना बढ़ा दी है। पहले यह फीस 50 रुपये थे। इसे अब 500 रुपये कर दिया गया है। ऐसे में गोपनीय परीक्षा का परिणाम लेने वाले छात्रों पर भी फीस का बोझ पड़ा है।
वहीं, फीस बढ़ोतरी के खिलाफ उतरे छात्र संगठन भी इस वसूली को सिर्फ विवि की आय बढ़ाने का जरिया बता रहे हैं। उनका कहना है कि इसमें छात्रों की कोई गलती नहीं है। विवि प्रशासन लगातार फीस बढ़ाकर शिक्षा को गरीब छात्रों की पहुंच से दूर करता जा रहा है।
एबीवीपी के प्रांत सहमंत्री नवनीत कौशल और एसएफआई के महासचिव मुनीश शर्मा ने कहा कि हर परीक्षा का परिणाम घोषित करने में विवि प्रशासन देरी करता है। फिर गोपनीय परीक्षा का परिणाम लेने को छात्रों से फीस की वसूली क्यों?
अपनी लापरवाही, बोझ छात्रों पर
45 दिन में रूसा का परिणाम घोषित करने का दावा करने वाला विवि इसे नौ माह में भी घोषित नहीं कर पाया। विवि प्रशासन अपनी परीक्षा प्रणाली, मूल्यांकन की प्रणाली में ऐसे सुधार लाए कि छात्रों को कांफिडेंशियल परिणाम निकालने की जरूरत ही न पड़े।
विश्वविद्यालय छात्रों की आवश्यकता के अनुसार परिणाम घोषित करने का शेड्यूल तैयार करे। यूजी डिग्री के अंतिम वर्ष के परीक्षा परिणाम में देरी पर आम छात्र को काउंसलिंग में हिस्सा लेने के लिए कांफिडेंशियल परिणाम निकालना पड़ता है।
साथ ही विवि प्रति विषय के हिसाब से भी घोषित होने से पूर्व परिणाम देता है। उसी के आधार पर आगे छात्रों का प्रवेश होता है।
ये रहेगा फीस का शेड्यूल
मद-----------------पुरानी दर------------नई दर
कांफिडेंशियल रिजल्ट---50----------------------500
विवि के छात्र-----------------------------------400
विदेशी संस्थान के छात्र------------------------3000
डुप्लीकेट डिग्री/ डीएमसी फार्म--50------------300
फार्म डिग्री एबसेंटिया---50---------------------500
इशू, वेरिफिकेशन/अटेस्टेशन--2000/1000-----1000/5000