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HPU: जरूर पढ़ें फीस बढ़ोतरी पर कमेटी के ये सुझाव

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हिमाचल सरकार की ओर से गठित की गई उच्च स्तरीय कमेटी ने प्रदेश विश्वविद्यालय और कॉलेजों में तर्कसंगत ढंग से फीस बढ़ाने की सिफारिश की है। कमेटी ने विश्वविद्यालय की ओर से की गई फीस बढ़ोत्तरी को काफी हद तक न्यायोचित माना है, लेकिन जिस अनुपात में फीस बढ़ोतरी की गई है, उसमें कुछ बदलाव करने की संस्तुति की गई है। सोमवार को इस तीन सदस्यीय कमेटी ने सचिवालय में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंपी दी।
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मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को रिपोर्ट का परीक्षण करने के  आदेश दिए हैं। परीक्षण करने के बाद ही सरकार की ओर से कोई कदम उठाया जाएगा। सूत्रों की मानें, तो कमेटी ने विश्वविद्यालय की ओर से की गई फीस पर काफी मंथन किया। इस सिलसिले में कमेटी ने विश्वविद्यालय प्रशासन के अलावा छात्रों से लेकर शिक्षकों और अभिभावकों तक से बातचीत की। कमेटी इस बात से सहमत है कि पिछले दो दशक से किसी प्रकार की फीस नहीं बढ़ाई गई है, जिसके कारण विश्वविद्यालय प्रशासन पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
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मुख्यमंत्री को सौंपी सीलबंद रिपोर्ट

आर्थिक दबाव के चलते विवि परीक्षा के खर्चे तक नहीं निकल पा रहा हैं। ऐसे में मौजूदा समय में फीस की दरें बढ़ाना समय की मांग है। हालांकि, छात्रों पर इसका कम भार कैसे पड़े, इस पर भी कमेटी की ओर से सुझाव दिए गए हैं। सूत्र बताते है कि कमेटी की रिपोर्ट को यदि सरकार ने मान लिया तो कई मदों में फीस की बढ़ी हुई वर्तमान दरें 10 से 20 फीसदी तक कम हो सकती हैं।

उच्च स्तरीय कमेटी ने सीलबंद रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी है। राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश वीके शर्मा की अध्यक्षता में 22 सितंबर को तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था, जिसमें पूर्व आईएएस सरोजनी गंजू ठाकुर और एआर चौहान को सदस्य बनाया गया था। दूसरी ओर प्रधान सचिव पीसी धीमान ने बताया कि इस रिपोर्ट पर उच्च शिक्षा विभाग की राय मांगी गई है।

मैंने अभी कमेटी की रिपोर्ट नहीं देखी है। क्या सिफारिशें की गई हैं? उच्च शिक्षा विभाग की ओर से परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
 - वीरभद्र सिंह, मुख्यमंत्री
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