9 मई को सुबह के सत्र में सुबह 9 से 11 बजे तक बीएससी एचएम एंड सीटी, बीएचएमसीटी और एमएससी पर्यावरण विज्ञान की प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। 10 मई को सुबह के सत्र में सुबह 9 से 11 बजे तक एमएससी भौतिक विज्ञान तथा सुबह 9 से दोपहर 12:15 बजे तक बीटेक और बी फार्मेसी की प्रवेश परीक्षा होगी। इसी दिन सायंकालीन सत्र में दोपहर 2 से 4 बजे तक एमसीए, एमबीए और एमबीए पर्यटन की प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। 9 मई को प्रस्तावित विषयों की प्रवेश परीक्षा के लिए केवल एक परीक्षा केंद्र तकनीकी विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित किया जाएगा। 10 मई को होने वाली परीक्षाओं के लिए 16 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलसचिव एवं परीक्षा नियंत्रक अनुपम कुमार ने बताया कि प्रवेश परीक्षा को लेकर सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। अभ्यर्थी विश्वविद्यालय की वेबसाइट से एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।
यहां बनाए गए हैं परीक्षा केंद्र
चंबा : राजकीय महाविद्यालय चंबा
कांगड़ा : राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला और डीएवी कॉलेज कांगड़ा
ऊना : राजकीय महाविद्यालय ऊना
हमीरपुर : राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर, गौतम कॉलेज ऑफ फार्मेसी और तकनीकी विश्वविद्यालय परिसर
बिलासपुर : शिवा कॉलेज ऑफ फार्मेसी, चांदपुर घुमारवीं
मंडी : अभिलाषी बीएड कॉलेज नेरचौक और सिरडा कॉलेज नौलखा सुंदरनगर
कुल्लू : विनायक फार्मेसी कॉलेज गड़सा
सोलन : अवस्थी कॉलेज नालागढ़ और एलआर कॉलेज सोलन
सिरमौर : हिमालयन इंजीनियरिंग कॉलेज कालाअंब
शिमला : राजकीय महाविद्यालय चौड़ा मैदान (कोटशेरा) और आईटीआई शिमला
एचपीटीयू के इंजीनियरिंग कॉलेजों में पीएचडी की तैयारी
तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर से संबद्ध इंजीनियरिंग कॉलेजों में पीएचडी शुरू करने की तैयारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने अधीन आने वाले 15 इंजीनियरिंग कॉलेजों से पीएचडी शुरू करने की संभावनाओं की जानकारी मांगी है। एचपीटीयू से संबद्ध केवल एक फार्मेसी कॉलेज में ही पीएचडी कार्यक्रम संचालित हो रहा है। अब इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। संबद्ध कॉलेजों से प्राप्त जानकारी पर विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल की बैठक में विस्तार से चर्चा होगी। बैठक में यह तय किया जाएगा कि किन कॉलेजों में पीएचडी कार्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं और इसके लिए आवश्यक मानकों को किस प्रकार लागू किया जाए। तकनीकी विश्वविद्यालय से करीब 45 संस्थान संबद्ध हैं, जिनमें लगभग 15 इंजीनियरिंग कॉलेज शामिल हैं। यदि इन कॉलेजों में पीएचडी कार्यक्रम शुरू होता है तो इससे शोध संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह पहल शिक्षकों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। सरकारी सेवाओं में पदोन्नति के दौरान यह देखा जाता है कि संबंधित शिक्षक ने कितने शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया है और कितने पीएचडी छात्रों के गाइड या सुपरवाइजर के रूप में कार्य किया है। ऐसे में इंजीनियरिंग कॉलेजों में पीएचडी कार्यक्रम शुरू होने से शिक्षकों के कॅरिअर विकास को भी नई दिशा मिल सकती है।
इंजीनियरिंग कॉलेजों में पीएचडी शुरू करने के लिए संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। संस्थानों से जानकारी मांगी गई है।-डॉ.राजेश कुमार, अधिष्ठाता शैक्षणिक, एचपीटीयू हमीरपुर