जमीन की अदला-बदली करने का मकसद आने वाले समय में विवि की जमीन पर कोई होटल, रेस्तरां, शॉपिंग मॉल, हॉस्टल, बहुमंजिला भवन खड़ा करना हो सकता है।
चूंकि जिन खरीदारों ने दडूही पंचायत में अलाटियों से जमीन खरीदी है, वह विवि से करीब 45-50 मीटर की दूरी पर है। अब खरीदार जिस जमीन पर अपना हक जता रहे हैं, वह विवि कैंपस से बिल्कुल साथ लगती है। जब विवि का अपना कैंपस शुरू हो जाएगा तो वहां पर आने वाले समय में बड़ा कारोबार शुरू हो सकता है।
1300 में से 52 कनाल भूमि मिली है विवि को
तकनीकी विवि को ग्राम पंचायच दडूही में भूमि आवंटित हुई है। 1300 कनाल भूमि में से 52 कनाल भूमि तकनीकी विवि के नाम हो चुकी है। जबकि शेष वन भूमि को तकनीकी विवि के नाम करने के लिए जिला प्रशासन ने फाइल वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को वर्ष 2014 से भेजी हुई है। तकनीकी विवि प्रशासन ने मिल चुकी 52 कनाल भूमि पर भवन निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है।
तकनीकी विवि की निशानदेही के दौरान पाया गया है कि जो भूमि खसरा नंबर फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा गया है, उसे कुछ व्यवसायियों के नाम कर दिया गया है।
राजस्व विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है, जिस भी राजस्व अधिकारी की इसमें संलिप्तता पाई जाएगी, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - राकेश कुमार प्रजापति, उपायुक्त हमीरपुर
तकनीकी विवि ने निशानेदही के दौरान यह मामला पकड़ा है। विवि ने जिस खसरा नंबर की फाइनल फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजी है, वह जमीन हमीरपुर के कुछ कारोबारियों के नाम कर दी गई है।
सवाल यह है कि राजस्व विभाग ने पहले खुद ही एफसीए केस बनाया और कुछ वर्ष के बाद वन भूमि को निजी लोगों के नाम कागजों में कर दिया। उपायुक्त हमीरपुर के ध्यान में इस मामले को लाया जा चुका है। - डॉ. विक्रम महाजन, कुलसचिव, हिप्र तकनीकी विवि हमीरपुर